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Rishikesh News: लाखों खर्च... फिर भी बदहाल संजय झील

Fri, 06 Feb 2026 03:01 AM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
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01 - संजय झील की टूटी सुरक्षा दीवार।संवाद - फोटो : संवाद
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14 हेक्टेयर में फैली संजय झील आज विकास की नहीं, बल्कि सरकारी उदासीनता की जीती-जागती तस्वीर बन चुकी है। लाखों की लागत से किए गए सौंदर्यीकरण के तमाम दावे अब कागजों और निरीक्षण फाइलों तक ही सीमित रह गए हैं। आज संजय झील अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है।
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वन विभाग की ओर से झील के सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। जगह-जगह बेंच लगाई गईं, सोलर लाइटें, टाइलें बिछाई गईं। मुख्य द्वार बनाया गया, पुलिया और रैंप का निर्माण भी हुआ। लेकिन रखरखाव के अभाव में टूटे बेंच, ढही दीवारें और झील में जमी मोटी काई साफ संकेत दे रही हैं कि वर्षों से इस ओर किसी ने झांक कर देखा तक नहीं है।



संजय झील केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर है। यही झील रंभा नदी का उद्गम स्थल मानी जाती है, जिसे स्थानीय लोग रंभा झील के नाम से भी जानते हैं। यहां अनेक प्रजातियों के पक्षी निवास करते हैं, लेकिन अव्यवस्था और गंदगी के कारण उनका अस्तित्व भी खतरे में पड़ता नजर आ रहा है।
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हैरानी की बात यह है कि अब यह झील असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुकी है। नशेड़ियों का जमावड़ा, जगह-जगह पड़े कूड़े, चिप्स के खाली पैकेट और सिगरेट की डिब्बियां प्रशासन की लापरवाही की पोल खोल रही हैं। झील के समीप लगी टाइलें टूटी पड़ी हैं, जबकि पुलिया पर लगाए गए लकड़ी के फट्टे तक उखड़ चुके हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।



इस मार्ग से गुजरने वाले पर्यटक और स्थानीय लोग भव्य मुख्य द्वार को देखकर यही सवाल करते हैं कि आखिर वर्षों से संजय झील को लेकर दिखाए गए सपने अब सिर्फ उम्मीदों तक ही सिमट कर रह गए हैं।

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कोट

संजय झील व पार्क क्षेत्र के रखरखाव तथा सौंदर्यीकरण के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। स्वीकृति मिलने पर कार्य शुरू कर दिए जाएंगे। - जीएस धमांदा, वनक्षेत्राधिकारी, ऋषिकेश
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