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I- दिल्ली सीमा पर किसानों के साथ अमानवीय व्यवहार कर रही सरकार : ताजेंद्रI
किसानों ने डोईवाला में ट्रैक्टर रैली निकालकर हाईवे मार्च किया। विरोध-प्रदर्शन कर केंद्र सरकार और विश्व व्यापार संघ का पुतला दहन किया। कहा कि सरकार किसानों के साथ टकराव की नीति पर काम कर रही है। दिल्ली सीमा पर आंदोलित किसानों के साथ अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाया।
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को भारी संख्या में किसान ट्रैक्टर लेकर गन्ना समिति परिसर में एकत्रित हुए। खनोरी में शहीद किसान शुभकरण सिंह की शहादत को नमन करते हुए किसानों ने 11 बजे संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक ताजेंद्र सिंह के नेतृत्व में ट्रैक्टर रैली निकाली। नगर के विभिन्न हिस्सों से होकर रैली देहरादून हरिद्वार हाईवे पहुंची। सरकार विरोधी प्रदर्शन करते हुए हाईवे पर केंद्र सरकार और डब्ल्यूटीओ का पुतला दहन किया।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए ताजेन्द्र सिंह ने कहा कि किसानों को वाजिब मांगों और अधिकारों को पाने के लिए खेतों को छोड़कर सड़कों पर आने के लिए विवश होना पड़ रहा है। बावजूद सरकार किसानों की मांगों की उपेक्षा कर रही है। दिल्ली बाॅर्डर पर किसानों के साथ सरकार अमानवीय व्यवहार कर रही है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल और प्रदेश सचिव सागर मनवाल ने कहा कि किसान विरोधी सरकार को सत्ता में रहने का हक नहीं है। किसान सभा मंडल अध्यक्ष बलबीर सिंह और याकूब अली ने कहा कि भाजपा सरकार कॉरपोरेट परस्त नीतियों को किसानों पर थोपना चाहती है।
किसानों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीद किसान शुभकरण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रदर्शन करने वालों में कृषक फेडरेशन अध्यक्ष उमेद वोरा, जाहिद अंजुम, याकूब अली, जगदीश कुकरेती, फुरकान अहमद कुरैशी, बुद्धदेव सेमवाल, हरेंद्र बालियान आदि शाामिल थे।
Iसरकार किसानों के साथ वादा खिलाफी कर रही है। एसएमपी की गांरटी पर आज तक कोई निर्णय नहीं हुआ। किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिला। किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस करने में सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की गई। किसान आक्रोशित होता जा रहा है। सरकार को चाहिए कि किसान हित में बड़ा फैसला ले। - गुलशन अरोड़ा, डोईवाला
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Iसरकार का व्यवहार किसानों के प्रति उदासीनता भरा है। राजधानी दिल्ली की सीमा पर किसान आंदोलन कर रहे हैं। सरकार खामोश है। लोक सभा चुनाव की आचार संहिता कभी भी लग सकती है। अन्नदाता किसानों के लिए सरकार ठोस कदम उठाने से परहेज कर रही है। किसानों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। -उमेद वोरा, सिमलास ग्रांट
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Iसरकार की नीतियों से त्रस्त होने के बाद किसान आंदोलन को मजबूर हुआ है। खेतों में खड़ी फसल को जंगली जानवर नुकसान पहुंचा रहे है। समय पर खाद, उपकरण और श्रमिक नहीं मिल रहे है। अन्नदाता किसान खेती छोड़ने पर विवश होता जा रहा है। सरकार की ओर से भी ठोस सकारात्मक नीतियां और कदम नहीं उठाए जाने से रोष है। -गुरदीप सिंह, शेरगढ़I