एसडीएम कोर्ट के आदेश पर वीरभद्र मार्ग स्थित पशुपालन विभाग की जमीन पर हुए अवैध कब्जे को स्थानीय प्रशासन ने शनिवार को ध्वस्त कर दिया। यहां करीब 5 बीघा भूमि पर गोमाता एवं सर्वजीव सेवा समिति पिछले 2001 से गो सदन संचालित कर रही थी। पशुपालन विभाग और समिति के बीच इस भूमि को लेकर लंबे समय से मुकदमेबाजी भी चल रही थी। एसडीएम कोर्ट का फैसला आने के बाद आखिरकार स्थानीय प्रशासन हरकत में आया और आननफानन में भूमि पर हुए निर्माण को जेसीबी से ध्वस्त करवाकर कब्जा मुक्त कर दिया। यहां मौजूद गोवंशों को विस्थापित क्षेत्र स्थित सरकारी गो सदन में शिफ्ट किया गया है। इस दौरान मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।
भेड़ एवं ऊन प्रसार संस्थान पशुलोक ऋषिकेश के परियोजना निदेशक डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि वीरभद्र मार्ग स्थित गो सदन हटाने से पहले गोमाता एवं सर्वजीव सेवा समिति, भगवानपुर आश्रम, पुष्कर मंदिर मार्ग को कई बार व्यक्तिगत और दूरभाष से सूचना दी गई। सूचनाओं का समिति ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद प्रशासन के सहयोग से कार्रवाई की गई। समिति पर 15 लाख 54 हजार 276 रुपये का जुर्माना भी ठोका गया है। दिसंबर 2001 में पशुपालन विभाग के तत्कालीन डिप्टी डॉयरेक्टर ने निराश्रित एवं बीमार पशुओं की चिकित्सा व देखरेख के उद्देश्य से गो माता एवं सर्वजीव सेवा समिति को पांच बीघा भूमि कुछ शर्तों के साथ दी थी। पशुपालन विभाग ने जून 2010 में भू आवंटन रद्द कर दिया था। भूमि को खाली करवाने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से समिति को नोटिस भी दिया गया। नोटिस के तहत 15 दिनों के भीतर भूमि खाली कर पशुपालन विभाग को कब्जा सौंपना था। कागजी प्रक्रिया को दरकिनार कर समिति भूमि पर काबिज रही।
गो सदन में बने छप्पर और भूसा गोदाम किया ध्वस्त
एसडीएम कोर्ट ने बीते तीन सितंबर को पशुपालन विभाग के पक्ष में फैसला सुनाया था और जुर्माने की राशि अदा करने का आदेश जारी कर दिया। पशुपालन विभाग के अनुसार जनहित के लिए उसे 5 बीघा भूमि की तत्काल जरूरत है। न्यायालय के अनुसार समिति को इस संबंध में कई बार सूचना दी गई। समिति ने नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया। अंतत: प्रशासन की कार्रवाई में जेसीबी से गो सदन में बने छप्परों और भूसा गोदाम को ध्वस्त कर दिया गया। इसके साथ ही भूमि के चारों ओर जेसीबी की सहायता से खाई बंदी कर दी गई। कार्रवाई के दौरान तहसीलदार रेखा आर्य, पशुपालन विभाग से डॉ. उत्तम कुमार, डॉ सुनील बेदी, डॉ. प्रसून दूबे, डॉ. मनोज तिवारी, डॉ. शालिनी पांडे, लेखपाल सतीश चंद्र जोशी उपस्थित रहे।
59 गोवंशों को सरकारी गो सदन भेजा
ऋषिकेश। पशुपालन विभाग की भूमि पर संचालित हो रहे गो सदन मेें रहने वाले गो वंशों को विस्थापित क्षेत्र के सरकारी गो सदन में शिफ्ट कर दिया गया है। इसमें कुल 59 गो वंश शामिल हैं, जिनमें 11 बछड़े , 43 गाय और सांड़ सहित 2 बीमार गो वंश भी शामिल हैं। तहसीलदार रेखा आर्य ने सरकारी गो सदन का निरीक्षण किया और उन्हें दी जाने वाली सेवाओं को भी देखा। इस दौरान भेड़ व ऊन प्रसार संस्थान पशुलोक के परियोजना निदेशक डॉ. राजेंद्र कुमार ने बताया कि वर्तमान मेें सरकारी गो सदन की देखरेख के लिए 10 कर्मी तैनात हैं।
समिति ने लगाया पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप
ऋषिकेश। गोमाता एवं सर्वजीव सेवा समिति के अध्यक्ष संजय शास्त्री ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गोशाला वर्ष 2001 से संचालित हो रही है। समिति के मुख्य संरक्षक स्वामी चिदानंद हैं। तत्कालीन विभागीय मंत्री बंशीधर भगत ने उक्त जमीन समिति को पहले मौखिक रूप से सौंपी थी। बाद में पशुपालन विभाग के तत्कालीन डिप्टी डायरेक्टर ने लिखित में भू आवंटन किया। वर्ष 2002 में मामला सिविल कोर्ट में दायर किया गया। इसी के तहत वर्ष 2010 में सिविल कोर्ट ने आदेश जारी किया कि विभाग विधिक प्रक्रिया के तहत ही समिति से भूमि खाली करवाए। इसी क्रम में पशुपालन विभाग की ओर से एसडीएम कोर्ट में मामला दायर किया गया। समिति अध्यक्ष का आरोप है कि अतिक्रमण की आड़ में प्रशासन ने गोशाला में हुए निर्माण को ध्वस्त किया है। संजय शास्त्री ने बताया कि इस मामले में समिति जिला न्यायालय में न्याय की गुहार लगाएगी।