ऋषिकेश में रानीपोखरी के नागाघेर में महेश तिवारी ने हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए अपनी बुजुर्ग मां बीतन देवी, पत्नी नीतू और तीन बेटियों अपर्णा, स्वर्णा और अन्नपूर्णा की बेरहमी से गला रेतकर हत्या कर दी थी। महेश के छोटे भाई नरेश ने नम आंखों और कांपते हाथों से सभी शवों को मुखाग्नि दी।
रानीपोखरी में हुए हत्याकांड में मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार के वक्त पूर्णानंद घाट पर महेश के ससुराल पक्ष के लोगों ने दामाद पर नीतू के साथ मारपीट के आरोप लगाए। दिवाली में मायके जाने के बाद नीतू चार माह बाद लौटकर आई थी। रिश्तेदारों का कहना था कि यदि नीतू मायके में होती तो जिंदा होती।
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हत्यारोपी महेश की सास मुनिया देवी ने बताया कि जब हमने बेटी की शादी की थी, तब दामाद बांदा जिले के अतर्रा में टैक्सी चलाता था। इसके बाद कई बार दामाद ने बेटी के साथ मारपीट की थी। दामाद के भाईयों और ननद ने भी उसके साथ कई बार मारपीट की। करीब सात साल पहले वह अपने बच्चे और पति के साथ रानीपोखरी आ गई थी। यहां दामाद का उसके साथ व्यवहार ठीक नहीं था।
पिछले साल दिवाली पर उसने अपने भाई पिंटू मिश्रा को फोन कर मायके आने की बात कही थी। जिस पर पिंटू और उसकी पत्नी पूनम मिश्रा उसको लेकर दिवाली से कुछ दिन पहले पन्ना मध्य प्रदेश आ गए। वहां पर वह चार महीने रही, लेकिन बेटियों की मोह ममता उसे खींचकर रानीपोखरी ले आई।
भाईयों ने नीतू को मायके में ही रहने के लिए कह दिया था, लेकिन उसने कहा कि मैं मायके कब तक रहूंगी। जिंदा रहूंगी या मरूंगी बच्चों के साथ ही रहूंगी। मार्च 2022 में भाई पिंटू और भाभी पूनम मिश्रा उसे छोड़ने के लिए रानीपोखरी आए थे। यदि वह मायके में रुक जाती तो आज यह दिन नहीं देखना पड़ता।