लक्ष्मणझूला पुल अपनी अवधि पूरी कर चुका है। आईआईटी के वैज्ञानिक पुल पर आवाजाही करने को खतरनाक बता चुके हैं। पिछले माह अप्रैल में पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों की रिपोर्ट पर पुल को बंद कर दिया। अब एक बार फिर स्थानीय लोगों के दबाव में झूला पुल के खोलने की तैैयारी का जा रही है। इंजीनियरों का कहना है कि पुल पर आवाजाही शुरू हुई तो अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता।
पौड़ी और टिहरी जिले को जोड़ने के लिए ब्रिटिश सरकार की ओर से वर्ष 1929 में गंगा नदी में लक्ष्मणझूला पुल का निर्माण कराया गया था। करीब 92 साल की अवधि पूरी करने के बाद 2019 में पीडब्ल्यूडी नरेंद्रनगर ने पुल की क्षमता को लेकर आईआईटी के सिविल विंग के वैज्ञानिकों से रिपोर्ट तैयार कराई गई थी। वैज्ञानिकों ने पुल पर आवाजाही को खतरनाक बताया था। जिस पर जुलाई 2019 में पुल पर आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई थी।
पीडब्ल्यूडी ने पुल के दोनों ओर लोहे की चादर खड़ी कर दी थी। तब करीब तीन महीने तक पुल पर आवाजाही बंद रही। उसके बाद स्थानीय लोगों के दबाव में प्रशासन ने पुल को खोल दिया था। ढाई साल तक आवाजाही होती रही। इसी साल मार्च में पुल की सर्पोटिंग तार भी टूट गई थी, तब एक दिन आवाजाही बंद रही। 16 अप्रैल को पुल पर दोनों ओर से पर्यटकों की भीड़ एकत्रित होने के बाद पुल पर जाम जैसा लग गया था। वहीं झूला पुल के पास में बन रहे बजरंग पुल के कारण पुल की और सुरक्षा को खतरा हो गया था। अनहोनी की आशंका देख पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने रिपोर्ट बनाकर जिलाधिकारी टिहरी ईवा श्रीवास्तव को भेजकर पुल पर आवाजाही बंद करने की मांग की थी।
डीएम के आदेश के बाद पुलिस और पीडब्ल्यूडी ने पुल पर आवाजाही बंद कर दी थी। अब एक बार फिर व्यापारियों के दबाव में झूला पुल को खोलने की तैयारी की जा रही है। पीडब्ल्यूडी मंत्री सतपाल महाराज घोषणा कर चुके हैं। विभागीय इंजीनियरों की माने तो यदि पुल को आवाजाही के लिए खोला जाता है तो अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता। संवाद