सर्वाइकल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से सुरक्षा देने वाला ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान फिलहाल अपनी मंजिल से दूर नजर आ रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि वैक्सीन उपलब्ध होने के बावजूद जन-जागरूकता और व्यापक प्रचार-प्रसार की कमी इस अभियान की सफलता में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बाद सबसे अधिक मामले गर्भाशय की ग्रीवा (सर्वाइकल) के कैंसर के आ रहे हैं। इसकी रोकथाम के लिए बीते 28 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के अजमेर से 14 वर्ष की लड़कियों के लिए देशव्यापी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया। लेकिन टीकाकरण अभियान अभी गति नहीं पकड़ पा रहा है। स्थिति यह है कि करीब एक माह का समय बीत जाने के बाद भी राजकीय उपजिला चिकित्सालय में मात्र 35 किशोरियों ने ही टीका लगवाया है।
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क्यों एचपीवी टीकाकरण जरूरी
लड़कियों के लिए एचपीवी वैक्सीन गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर से बचाव का सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपाय है, जो 9-14 वर्ष की आयु में सबसे अच्छा काम करती है। यह टीका प्रमुख रूप से 9-14 वर्ष की बालिकाओं को दो खुराक (6-12 महीने के अंतराल पर) में दिया जाता है। इस टीकाकरण का शरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। यह पूर्ण रूप से सुरक्षित है।
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एचपीवी वायरस क्या है
ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) एक बहुत ही सामान्य वायरस समूह है, जिसमें 100 से अधिक प्रकार होते हैं। यह मुख्य रूप से त्वचा और शरीर के संवेदनशील हिस्सों को संक्रमित करता है। एचपीवी मुख्यतः त्वचा के संपर्क और यौन संपर्क के जरिए फैलता है। कई बार व्यक्ति को पता भी नहीं चलता कि वह इस वायरस से संक्रमित है। अधिकांश एचपीवी संक्रमण अपने आप ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ प्रकार लंबे समय तक शरीर में रहने पर सर्वाइकल कैंसर, गले, मुंह और जननांग से जुड़े अन्य कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां का कारण बनते हैं।
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- टीकाकरण अभियान 28 फरवरी से शुरू हुआ था। राजकीय उपजिला चिकित्सालय में भी एचपीवी टीकाकरण किया जा रहा है। अभी तक 35 किशोरियों को यह टीका लगाया गया है। - डॉ. आनंद सिंह राणा, सीएमएस, राजकीय उपजिला चिकित्सालय ऋषिकेश