ऋषिकेश। कोरोना की तीसरी लहर अगर आयी तो बच्चों के लिए उपचार का संकट पैदा हो सकता है। ऋषिकेश तहसील क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में केवल दो ही बाल रोग विशेषज्ञ तैनात है। जबकि शून्य से 14 साल तक के बच्चों की आबादी 61 हजार 230 है। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के अनुसार योगनगरी को 61 बाल रोग विशेषज्ञों की जरूरत है।
सरकार और स्वास्थ्य महकमे ने बाल रोग चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने की ओर ध्यान नहीं दिया। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है हर साल बच्चों की जनसंख्या में इजाफा होता चला गया। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा संसाधनों में जरूरत के अनुसार बढ़ोत्तरी नहीं की। अब तीसरी लहर के खतरे को देखते हुए सरकाल्र ने बच्चों के लिए कोविड वार्ड बनाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। लेकिन बच्चों के इलाज के लिए पर्याप्त संख्या में बाल रोग विशेषज्ञ की जरूरत भी है। प्रदेश में पिछले साल मार्च में पहला कोरोना संक्रमित मिला था। इसके बाद 14 माह के दौरान सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा सेटअप और उपकरणों को बढ़ाने पर जोर दिया। लेकिन जरूरत के हिसाब से मैन पॉवर नहीं जुटाई गई। बच्चों की चिकित्सा व्यवस्था को तो पूरी तरह से नजर अंदाज कर दिया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के अनुसार एक हजार बच्चों की आबादी पर एक बाल रोग विशेषज्ञ तैनात होना चाहिए। लेकिन योगनगरी की स्वास्थ्य व्यवस्था तो एसपीएस राजकीय चिकित्सालय में तैनात दो बाल विशेषज्ञों के भरोसे से ही चल रही है। ऐसे में अगर तीसरी लहर आती है है बाल रोग विशेषज्ञों के आभाव में बच्चों की जान पर बन सकती है। वहीं तीसरी लहर से पहले बच्चों की सुरक्षा के लिए बाल रोग विशेषज्ञों की तैनाती सरकार और स्वास्थ्य विभाग दोनों के लिए भी बड़ी चुनौती है।
- फिलहाल संक्रमण की दर कम हो रही है। लेकिन एतिहात के तौर बाल रोग विशेषज्ञों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जरूरत के अनुसार और संसाधनों की व्यवस्था भी जाएगी।
अनूप डिमरी, सीएमओ, देहरादून