तीर्थनगरी में दुपहिया वाहन चालकों के लिए लागू अनिवार्य हेलमेट योजना चंद दिनों में ही बाद धड़ाम हो गई। अब पुलिस ना शहर के तिराहा, चौराहों पर हेलमेट की चेकिंग कर रही और ना ही हेलमेट के प्रति लोगों को जागरूक करने वाले नजर आ रहे हैं। स्थिति यह है कि शहर से बाहर नाकों पर भी चेकिंग नहीं हो रही।
ऐसे में दुपहिया वाहन चालक बिना हेलमेट के सड़कों पर सरपट दौड़ रहे हैं। हेलमेट आपकी सुरक्षा के लिए है। घर से दुपहिया वाहन से निकलें तो हेलमेट जरूर पहनें। इसी नसीहत के साथ जागरूक लोगों की पहल पर पुलिस ने 20 जनवरी से शहर में हेलमेट लागू किया।
शुरुआत में पुलिस ने नटराज चौक, चंद्रभागा पुल तिराहा, कोयल घाटी तिराहा और घाट चौक पर हेलमेट नहीं पहनने वालों पर सख्ती की और चालान काटे। पुलिस की सख्ती का खासा असर भी दिखाई दिया। सड़कों पर अधिकांश दुपहिया वाहन चालक हेलमेट पहने नजर आए। चालान में पुलिस को राजस्व की प्राप्ति भी हुई।
लेकिन दो सप्ताह की सख्ती के बाद पुलिस का अभियान शिथिल पड़ने पर शहर में लागू हेलमेट योजना भी हवा हवाई हो गई। अब स्थिति यह है कि दुपहिया चालक बिना हेलमेट के पुलिस के सामने से खुलेआम गुजर रहे हैं। पुलिस की क्या मजाल जो इन्हें रोके।
हैरान करने वाली बात यह है कि शहर से बाहर हेलमेट को अनिवार्य बनाने वाली पुलिस दून मार्ग पर जंगलात चौकी बैरियर, हरिद्वार मार्ग पर आईडीपीएल सिटी गेट के पास भी चेकिंग नहीं कर रही है। क्षेत्रवासी देवेंद्र राजपूत का कहना है कि शहर में हेलमेट की सराहनीय पहल हुई थी।
लेकिन कुछ लोगों के विरोध और पुलिस की शिथिलता के चलते योजना टांय टांय फिस्स हो गई। अंकित तिवारी ने बताया कि हेलमेट अपनी सुरक्षा के लिए है। लिहाजा कोई पहने या नहीं, लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए मैं तो शुरू से ही हेलमेट पहनकर चलता हूं। हेलमेट जब पूरे देश में लागू है तो ऋषिकेश में क्यों नहीं हो सकता। शिवकुमार गौतम ने बताया कि हेलमेट चालान से बचने के लिए नहीं सुरक्षा के लिए जरूरी है।
शहर में हेलमेट पहनना लागू है। इसमें किसी तरह की ढील नहीं दी गई है। हां अर्द्धकुंभ के स्नान पर्व में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर फोर्स के व्यस्त होने के कारण एक सप्ताह से चेकिंग अभियान प्रभावित जरूर है। वसंत पंचमी का स्नान पर्व निपटते ही हेलमेट नहीं पहनने वालों के खिलाफ चेकिंग अभियान चलाया जाएगा।-चक्रधर अंथवाल, पुलिस क्षेत्राधिकारी