धीरेंद्र वीर सिंह ने टीएचडीसी के सातवें अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के रूप में बृहस्पवितार को कार्यभार ग्रहण किया। नवनियुक्त प्रबंध निदेशक ने राज्य में विद्युत उत्पादन के लिए हाईड्रो प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इसके लिए सहयोग करना चाहिए।
टीएचडीसी के गंगा भवन में आयोजित पत्रकारवार्ता में नवनियुक्त अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने कहा कि विद्युत उत्पादन के लिए 40 प्रतिशत योगदान हाईड्रो प्रोजेक्ट और 60 प्रतिशत अन्य स्रोत होने चाहिए, लेकिन वर्तमान में हाईड्रो प्रोजेक्ट घटकर 14.50 प्रतिशत रह गया है। यह अच्छा संकेत नहीं है।
उन्होंने वर्ष 2013 में केदारनाथ जलप्रलय का उदाहरण देते हुए कहा कि टीएचडीसी बांध ने पानी के एक बड़े सैलाब को रोके रखा। बांध नहीं होता तो निचले इलाकों में बाढ़ के पानी से व्यापक क्षति होती। लिहाजा भविष्य में जल प्रलय से होने वाली आपदा को रोकने के लिए हाईड्रो प्रोजेक्ट जरूरी हैं।
अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने बताया कि संस्था के पास वर्तमान में 18 परियोजनाएं है। इनकी कुल संस्थापित क्षमता 6374 मेगावाट है। खुर्जा में थर्मल पावर प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इस मौके पर निदेशक तकनीकी विजय गोयल, वरिष्ठ प्रबंधक कारपोरेट संचार कपिल दुबे मौजूद थे।
धीरेंद्र वीर सिंह नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एनआईटी राउरकेला से सिविल अभियांत्रिकी में स्नातक हैं। उन्हें भूमिगत व पावर हाउस के कार्यों, स्पिलवे, संविदाओं, सामग्री प्रबंधन, पुनर्वास और सिविल के बड़े निर्माण कार्यों के संबंध में तीन दशकों से अधिक कार्य करने का भी अनुभव है।
टीएचडीसी में नियुक्ति से पहले वह लार्सन एंड ट्यूब्रो में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहे। कोटेश्वर परियोजना को दक्षता से कार्यान्वित करने के लिए उन्हें आईआईटी रुड़की में इंस्टीट्यूशंस ऑफ इंजीनियर्स इंडिया के नेशनल कनवेंशन के दौरान इमीनेंट इंजीनियरिंग पर्सनाल्टी का सम्मान भी मिला है।