मुनि की रेती क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पूर्णानंद घाट पर गंगा का स्वरूप लगातार बदल रहा है। घाट से गंगा की मुख्य जलधारा काफी दूर खिसक चुकी है, जिसके चलते यहां आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जलधारा दूर होने के बावजूद पर्यटक अपनी जान जोखिम में डालकर उबड़-खाबड़ और पथरीले रास्तों को पार कर गंगा तट तक पहुंच रहे हैं, जिससे किसी भी समय बड़ी अनहोनी होने का अंदेशा बना हुआ है। मोक्षधाम के पास अब गंगा की जलधारा नहीं पहुंच पा रही है। जल स्तर कम होने और धारा के मार्ग बदलने से यहां घाट का वह हिस्सा सूखने की स्थिति में पहुंच गया है, जहां अमूमन अंतिम संस्कार या धार्मिक अनुष्ठान किए जाते है। जलधारा के दूर होने से अंतिम संस्कार करने आने वाले परिजनों को भी धार्मिक क्रियाएं पूरी करने में भारी असुविधा हो रही है। दिन के समय तो लोग किसी तरह संभलकर पानी तक पहुंच जाते हैं, लेकिन सबसे गंभीर स्थिति शाम ढलने के बाद बनती है।