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श्यामपुर के खादर क्षेत्र में घुसा बाढ़ का पानी

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खदरी में बाढ़ क्षेत्रों का दौरा करते सिंचाई विभाग के अधिकारी। - फोटो : RISHIKESH
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ऋषिकेश। बीती सोमवार रात भारी बरसात के कारण सौंग नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। इससे बाढ़ का पानी श्यामपुर न्याय पंचायत की ग्राम सभा खदरी खड़क माफ के खादर क्षेत्र की सीमा में प्रवेश कर गया। जिससे खादर स्थित खेतों की सीमा पर वन्यजीवों से फसल सुरक्षा को बनाई गई खाई में बाढ़ का पानी भर गया। खेतों में मकान बनाकर रह रहे ग्रामीण किसानों रातभर जागकर रात बितानी पड़ी।
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ग्रामीण सोहन लाल का कहना है कि वन्यजीवों की आमद को रोकने के लिए वन विभाग की ओर से खोदी गई खाई में पानी आ जाने से पानी को निकलने का रास्ता मिल गया। यदि बाढ़ के पानी को रास्ता न मिलता तो खेतों में कटाव होने की संभावना थी। कृषक और पूर्व सैनिक लाखी राम रतूड़ी का कहना है कि बाढ़ प्रबन्धन से संबंधित अधिकारी हर साल बाढ़ आने पर ही दिखाई देते हैं। उसके बाद सालभर किसी भी अधिकारी का पता नहीं चलता है। कृषक खुशी राम ने बताया कि पूर्व जिला पंचायत सदस्य सुनीता उपाध्याय के कार्यकाल में जिला पंचायत के माध्यम से सौंग नदी की बाढ़ से सुरक्षा की फाइल सिंचाई विभाग को प्रेषित की गई थी। लेकिन, उसका क्या हुआ? इस बात का भी आजतक पता नहीं चला है। जबकि गौहरी माफी में आपदा प्रबंधन के तहत नदी की दिशा को बदलने के प्रयासों से नदी का रुख खदरी की ओर हो गया है, जिससे मुर्गी फार्म के निकट सौंग नदी का पानी टक्कर मारने लगा है। इससे कभी भी सौंग नदी की बाढ़ का पानी खदरी गांव में प्रवेश कर सकता है।
गैस गोदाम के निकट रहने वाले पूर्व सैनिक चंडीप्रसाद भट्ट का कहना है कि बारिश होते ही बाढ़ के भय के कारण रातभर जागकर बितानी पड़ती है। वर्ष 1998 में आई सौंग नदी की बाढ़ से खदरी के किसानों की लगभग साठ बीघा उपजाऊ भूमि नदी क्षेत्र में तब्दील हो चुकी है, जिनको न तो आजतक मुआवजा ही मिला और न आज तक वहां तक सुरक्षा तटबन्ध ही हो पाए हैं। बाढ़ से खेतों को जोड़ने वाला रास्ता कट जाने के कारण खेतों से संपर्क कट चुका है। संबंधित अधिकारियों द्वारा सुनवाई न होने के कारण ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों से जब भी सुरक्षा प्रबंध करने की बात की जाती है तो योजना में लिया गया है, लेकिन बजट नहीं है कहकर टाल देते हैं या फिर गोलमोल जवाब देकर नेताओं जैसा व्यवहार करते हैं।
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