- परियोजना में शामिल कुल 42 में से से 37 ब्रेक थ्रू (आर-पार) हो गए हैं, खोदाई का काम अब अंतिम चरण में
- शुक्रवार को ढालवाला से नीरगड्डू तक करीब 5.2 किमी हिस्से की सहायक सुरंग को किया गया आर पार
ऋषिकेश। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना के पैकेज वन के पहले हिस्से की सहायक सुरंग शुक्रवार को आर-पार हो गई। परियोजना में कुल 42 ब्रेक थ्रू होने हैं जिनमें से 37 ब्रेक थ्रू (आर-पार) हो गए हैं।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना का काम तेजी से किया जा रहा है। सुरंगों की खोदाई का काम अब अंतिम चरण में हैं। परियोजना में मुख्य और सहायक सुरंगों की कुल संख्या 16 है और इनकी कुल लंबाई 213 किमी है। इसमें से 208 किमी खोदाई पूरी हो गई है। परियोजना की पहली सुरंग ढालवाला से शिवपुरी तक है जिसकी कुल लंबाई करीब 10 किमी है। इस सुरंग का खोदाई कार्य दो हिस्सों में किया जा रहा है। इसमें एक हिस्सा ढालवाला से नीरगड्डू है जिसकी लंबाई करीब पांच किमी है। दूसरा हिस्सा नीरगड्डू से शिवपुरी तक का है जिसकी लंबाई करीब 5.2 किमी है। सुरंग की खोदाई का कार्य मई 2021 में शुरू किया गया था। नीरगड्डू से शिवपुरी मुख्य सुरंग का ब्रेक थ्रू (आर-पार) बीते 15 अप्रैल को हो गया था। इस हिस्से की सहायक सुरंग पहले की आर-पार हो चुकी थी। शुक्रवार को ढालवाला से नीरगड्डू तक करीब 5.2 किमी हिस्से की सहायक सुरंग का भी ब्रेक थ्रू कर लिया गया है। आरवीएनएल के अधिकारियों का कहना है कि अगले वर्ष जनवरी में इस हिस्से की मुख्य सुरंग भी आर-पार कर दी जाएगी।
13 स्टेशन हैं शामिल पूरी परियोजना में
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन पर कुल 13 स्टेशन शामिल हैं। इनमें वीरभद्र और योगनगरी रेलवे स्टेशन का कार्य पूर्ण हो चुका है। योगनगरी रेलवे स्टेशन तक ट्रेनें संचालित हो रही हैं। इनके अलावा शिवपुरी, ब्यासी स्टेशन का निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है। देवप्रयाग, जनासू, मलेथा, श्रीनगर, धारीदेवी, तिलनी, घोलतीर, गौचर व सिंवई (कर्णप्रयाग) स्टेशनों के निर्माण की प्रक्रिया भी गतिमान है। परियोजना में कर्णप्रयाग (सिंवई) स्टेशन सबसे बड़ा है। स्टेशन की सामरिक महत्ता को देखते हुए वर्ष 2023 में इसमें बड़ा बदलाव किया गया था। यहां पहले 22 ट्रैक बनने थे जिन्हें बढ़ाकर 26 कर दिया गया था।
अब तक हो चुके हैं 36 ब्रेक थ्रू
पूरी रेललाइन पर 16 मुख्य और 12 सहायक सुरंगें बनाई जा रही हैं। सात सहायक सुरंगें हाईवे से जुड़ रही हैं जो आपातकाल में निकासी का कार्य करेंगी। 16 सुरंगों में 42 ब्रेक थ्रू होने हैं। इनमें से अब तक 36 ब्रेक थ्रू हो चुके हैं। 2027 के अंत तक सुरंगों की खोदाई का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना अधिकारियों ने बताया कि अधिकांश सुरंगों को पक्का करने का काम भी शुरू कर दिया गया है। करीब 155 किमी सुरंगों में फाइनल लाइनिंग (सुरंगों की छत आदि का निर्माण) कर दिया गया है।
सुरंगों के अंदर होगा बेलास्टलेस (बिना गिट्टी वाला ट्रैक)
परियोजना में 750 करोड़ की लागत से ट्रैक बिछाया जाएगा। जुलाई 2024 को इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूर्ण हुई थी। भारतीय रेलवे के उपक्रम इरकॉन इंटरनेशनल ट्रैक बिछाने का कार्य कर रहा है। इस रेलवे लाइन का 84 फीसदी हिस्सा सुरंग के अंदर से गुजरेगा। 125 किमी दूरी वाली इस रेलवे लाइन का 105 मीटर हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा। इसलिए सुरंगों के अंदर बेलासलेस (बिना गिट्टी वाला ट्रैक) बनाया जाएगा। अब तक करीब दो किमी ट्रैक बिछा दिया गया है।
परियोजना में कुल 19 पुल
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे परियोजना में कुल 19 पुल हैं। इनमें से चंद्रभागा, शिवपुरी, गूलर, ब्यासी, कौड़ियाला, पौड़ी नाला, लक्ष्मोली व श्रीनगर के पुल बन कर तैयार हो चुके हैं। शेष 11 पुलों का निर्माण कार्य भी 70 फीसदी से अधिक पूर्ण हो चुका है।
- परियोजना के पैकेज वन सुरंग के ढालवाला से नीरगड्डू तक वाले हिस्से की सहायक सुरंग शुक्रवार को आर-पार कर दी गई है। पैकेज वन सुरंग में दो ब्रेक थ्रू पहले किए जा चुके हैं। अगले वर्ष जनवरी में इस पैकेज का अंतिम ब्रेक थ्रू भी कर लिया जाएगा। - ओपी मालगुड़ी, उप महाप्रबंधक, सिविल, आरवीएनएल।