रोडवेज डिपो का अपना भवन न होने से नुकसान, टिन शेड पर चल रहा कार्यालय
12 साल पहले जमीन मिली, लेकिन बजट आज तक नहीं
प्रतिदिन छह हजार रुपये चुकाने पड़ते हैं पार्किंग शुल्क
12 साल बाद भी रोडवेज डिपो का अपना भवन नहीं बना। आईएसबीटी में रोडवेज डिपो किराए की जमीन पर चल रहा है। आने-जाने वाली बसों से पार्किंग शुल्क वसूला जाता है। प्रतिदिन यह शुल्क छह हजार रुपये है। इस लिहाज से एक साल में यह राशि 22 लाख रुपये होती है। पार्किंग शुल्क में लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी रोडवेज भवन निर्माण के लिए कोई कवायद नहीं हो रही है।
2010 में रोडवेज प्रशासन पुराना बस अड्डे का केस हार गया था। तब बस अड्डे के लिए शासन की ओर से नटराज चौक के पास एक हेक्टेयर वन भूमि उपलब्ध कराई गई थी। बसों के संचालन के लिए आईएसबीटी के पास टिन शेड में ऑफिस खुलवाकर वहीं परिसर में से ही बसों के संचालन की अनुमति दी गई थी। यह बस अड्डा पर्यटन विभाग का है। जिसका रखरखाव का काम नगर निगम की ओर से किया जाता है। नगर निगम ऋषिकेश डिपो की प्रत्येक बस से जाते समय प्रति फेरे के 75 रुपये पार्किंग शुल्क वसूलता है। डिपो की बसें दिनभर में औसत 80 बसें आवागमन करती हैं। एक दिन में पार्किंग शुल्क औसत छह हजार और महीने का एक लाख 80 हजार है। जबकि एक साल में 21 लाख 60 हजार चुकाना पड़ता है। यह सिलसिला सालों से चला आ रहा है।
कई बार हुआ सर्वे
नटराज चौक के पास बस अड्डे के लिए जो एक हेक्टेयर जमीन दी गई है वह उस पर बस अड्डे के निर्माण के लिए कई बार सर्वे हो चुका है। पिछले साल अक्तूबर में भी रोडवेज मुख्यालय की ओर से बस अड्डे के लिए सर्वे कराया गया था। लेकिन उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चले गया।
टिन शेड में चल रहा कार्यालय
रोडवेज डिपो का कार्यालय टिन शेड के नीचे चल रहा है। ई-टिकटिंग रूम और कैश रूम एक ही कमरे में हैं। रोडवेज डिपो के भवन के लिए न तो स्थानीय स्तर से शासन को कोई पत्राचार हो रहा है और न ही रोडवेज मुख्यालय कोई कदम उठा रहा है।
रोडवेज भवन के लिए नटराज चौक के पास जगह आवंटित है। लेकिन बजट के अभाव में भवन का निर्माण नहीं हो पा रहा है। इसलिए पार्किंग शुल्क देना पड़ रहा है। - संजय गुप्ता, मंडलीय महाप्रबंधक संचालन रोडवेज देहरादून