मनरेगा योजना में पारदर्शिता लाने के लिए अब प्रत्येक जॉब कार्डधारी श्रमिक को ई-केवाईसी कराना आवश्यक होगा। इससे फर्जी जॉब कार्डधारियों की पहचान हो सकेगी। वास्तविक लाभार्थियों को ही योजना का लाभ मिलेगा। ई- केवाईसी प्रकिया से निष्क्रिय जॉब कार्ड में मनरेगा से भुगतान बंद हो जाएंगे।
विकासखंड के अलग-अलग गांवों में जॉब कार्डधारियों के ई-केवाईसी के लिए अभियान चलाया जा रहा है। पंचायत स्तर पर चलाए जा रहे इस अभियान के दौरान अब तक विकासखंड यमकेश्वर में लगभग 73 प्रतिशत जॉब कार्डधारियों का ई-केवाईसी करवाया जा चुका है।
अधिकारियों की मानें तो मनरेगा में सात हजार श्रमिक जॉब कार्डधारी हैं। इसमें से अभी तक 5 हजार जॉब कार्डधारियों की ई- केवाईसी की जा चुकी है। अक्तूबर से चल रहे अभियान के तहत अभी तक 72.80 फीसदी जॉब कार्डधारियों के ई-केवाईसी हो चुके हैं।
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वास्तविक मजदूरों को होगा फायदा
ई-केवाईसी से सरकार और मनरेगा के वास्तविक मजदूरों का फायदा होगा। सरकार का उद्देश्य अब सिर्फ वास्तविक मजदूरों को काम उपलब्ध कराने की गारंटी है। मजदूरों को समय पर मजदूरी का भुगतान भी होगा। सबसे बड़ी बात है कि प्रधानमंत्री आवास जैसी सरकारी योजना के लाभ के लिए भी ई-केवाईसी आवश्यक होगा।
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कोट
- ग्राम्य विकास विभाग की टीम को पंचायतों में भेजकर मनरेगा श्रमिकों की ई-केवाईसी करवाई जा रही है। मनरेगा जॉब कार्ड धारक श्रमिकों से ई-केवाईसी प्रकिया में सहयोग करने की अपील की जाती है। - आकाश बेलवाल, खंड विकास अधिकारी, यमकेश्वर