वन विभाग की उदासीनता के कारण पिछले कई सालों से धड़ल्ले से चंद्रभागा नदी का दोहन किया है। यहां आईएसबीटी के पीछे वनभूमि पर करीब डेढ़ दर्जन से अधिक टुल्लू पंप अवैध रूप से संचालित कर वाहनों की धुलाई का काम किया जा रहा है। इससे जहां रोजाना हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है, वहीं विभाग को भी राजस्व का हजारों रुपये का चूना लगाया जा रहा है। यह सब खुलेआम हो रहा है, लेकिन विभाग के अफसर इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
दरअसल वन विभाग की भूमि पर टुल्लू पंप संचालन करने के लिए वन विभाग से अनुमति लेनी जरूरी है। इसके साथ ही राजस्व विभाग को भी इसका मासिक भुगतान करना होता है, लेकिन यहां पंप संचालकों के पास न तो वन विभाग की अनुमति हैं और न ही राजस्व विभाग को किसी तरह का कोई भुगतान किया जा रहा है। मनमानी का आलम यह है कि यहां एक ही व्यक्ति द्वारा तीन-तीन टुल्लू पंपों का संचालन किया जा रहा है। सुबह से शाम तक यहां टुल्लू पंप चले रहते हैं वाहनों की धुलाई की जाती है। चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले पर्यटन विभाग की ओर से सड़क का निर्माण का काम किया गया था, लेकिन रोजाना बह रहे पानी के कारण यह सड़क जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गई है।
चंद्रभागा नदी में वन भूमि पर संचालित टुल्लू पंप संचालकों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। अवैध रुप से संचालित टुल्लू पंपों को बंद किया जाएगा।
देवेंद्र पुंडीर, वनक्षेत्राधिकारी ऋषिकेश