प्रतीत नगर पंचायत कार्यालय से करीब 12 वर्ष पुराने पेयजल योजना के अभिलेख गायब हैं। इस योजना के तहत उपभोक्ताओं से ली जाने वाली धनराशि बैंक खाते में जमा नहीं हो रही है। ग्राम प्रधान राजेश जुगलान ने इस योजना में भारी अनियमितताओं की आशंका जताते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी को पत्र लिखकर जांच की मांग की है।
प्रतीत नगर पेयजल योजना पर ऊर्जा निगम का 12 लाख से अधिक बकाया है। ऊर्जा निगम ने पंचायत को 12 लाख 34 हजार 51 रुपये का बिल भेजा है। इस बिल भुगतान के लिए पंचायत के पास बजट नहीं है। तीन माह से पंप ऑपरेटर को मानदेय नहीं मिला है। जबकि उपभोक्ताओं से हर महीने पानी का बिल वसूल किया जा रहा है।
अब सवाल यह है कि उपभोक्ताओं से लिया जा रहा यह पैसा आखिर किसके खाते में जमा हो रहा है। ग्राम प्रधान राजेश जुगलान का कहना है कि इस बिल भुगतान के लिए पंचायत के पास कोई निधि उपलब्ध नहीं है। वहीं इस मामले में जिला पंचायत राज अधिकारी विद्यादत सोनवाल से जानकारी लेने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
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क्या है मामला
मामला प्रतीत नगर ग्राम पंचायत का है, जहां वर्ष 2012 में लाखों रुपए की लागत से गोरखा समिति पेयजल योजना तैयार की गई थी। इस योजना के तहत ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था। योजना के तहत पंचायत की व्यवस्था निर्धारित की गई थी जिसमें प्रत्येक उपभोक्ता से प्रतिमाह 100 रुपये का शुल्क लिया जाना था। उपभोक्ताओं से ली गई धनराशि से इस योजना का रखरखाव, संचालन और बिजली के बिल का भुगतान भी किया जाना था। उपभोक्ताओं से ली गई धनराशि को बैंक खाते में जमा किया जाना था। ग्राम प्रधान राजेश जुगलान के अनुसार 13 अक्तूबर 2025 को उन्होंने ग्राम प्रधान का पदभार ग्रहण किया। लेकिन उनको इस योजना से संबंधित कोई भी आवश्यक अभिलेख आज तक उपलब्ध नहीं कराए गए। राजेश जुगलान का आरोप है कि इस योजना से संबंधित दस्तावेज पंचायत कार्यालय से गायब है जो वित्तीय अनियमितताओं को दर्शाता है।