रमजान के पहले जुमा पर शहर की मसजिदों में नमाजियों की भीड़ उमड़ी। मस्जिदों के बाहर और छतों पर नमाज अदा की गई। जुमे की तकरीरों में रमजान की अहमियत बताई गई। इस मौके पर पेश इमामों ने देश-दुनिया और समाज में खुशहाली, भाईचारे की दुआ कर्राई।
डोईवाला नगर, तेलीवाला, कुडकावाला, भानियावाला स्थित मसजिदों में नमाजियों के पैर रखने की जगह नहीं रही। जामा मस्जिद तेलीवाला के इमाम मुफ्ती करामत अली ने बयान कर फरमाया कि माह-ए-रमजान में दस दस दिनों के तीन असरे होते है। रमजान के पहले अशरा रहमत का होता है।
खुदा अपने बंदो पर रहम करता है। रोजे के महत्व को बताते हुए कहा कि रोजा खाने पीने से रुकने का नाम नहीं है। रोजा इंसान से गुनाहों से बचाने का माध्यम है। रोजा वास्तव में अल्लाह और बंदे को जोड़ने का काम करता है। बताया कि रोजा संयमित जीवन जीने और दीन के बताए रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने जकात की भी फजीलत बताई।