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अपनी बेटियों को संकोच नहीं, समझ दें: स्वामी चिदानंद

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परमार्थ निकेतन में पूर्व जत्थेदार अकाल तख्त साहब सरदार ज्ञानी गुरुबचन सिंह पहुंचे। आश्रम में उन्होंने आयोजित मासिक श्रीराम कथा में शिरकत कर सनातन धर्म और सिख परंपराओं के साझा आध्यात्मिक मूल्यों, सेवा, करुणा और राष्ट्रभक्ति का दिव्य संदेश दिया।
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स्वामी चिदानंद सरस्वती ने मासिक धर्म स्वच्छता दिवस पर कहा अपनी बेटियों को संकोच नहीं, समझ दें, चुप्पी नहीं, चर्चा करें। क्योंकि नारी ही शक्ति है, नारी ही संस्कृति है और नारी ही सृष्टि है। जिस विषय पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए, उसी को आज भी समाज में शर्म और चुप्पी के पर्दे के पीछे छिपा दिया जाता है।



मासिक धर्म कोई अभिशाप नहीं, बल्कि सृष्टि के संचालन की ईश्वर प्रदत्त दिव्य प्रक्रिया है, जिस नारी के गर्भ से संपूर्ण मानवता जन्म लेती है, उसी नारी को उसके स्वाभाविक जैविक चक्र के कारण अपवित्र समझना हमारी सोच की सबसे बड़ी अशुद्धि है। कहा जब तक हमारी बेटियां अपने शरीर, स्वास्थ्य और स्वाभिमान को लेकर भय, शर्म और असहजता में जीती रहेंगी, तब तक सशक्त समाज का निर्माण केवल एक सपना रहेगा। स्वस्थ नारी ही सशक्त समाज की आधारशिला है।
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स्वामी ने कहा कि आज आवश्यकता केवल सैनिटरी उत्पाद बांटने की नहीं, बल्कि सोच बदलने की है। जब मां अपनी बेटी से खुलकर बात करेगी, जब पिता अपनी बेटी के स्वास्थ्य को समझेगा, जब विद्यालयों में इस विषय पर शिक्षा और संवेदनशीलता होगी, तभी वास्तविक परिवर्तन आएगा। ज्ञानी गुरुबचन सिंह महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा, अमृत कथा है। सिख धर्म में दो ग्रंथ हैं। एक श्री गुरु ग्रंथ साहिब और दूसरा दशम ग्रंथ, जिसमें श्री गुरु गोविंद सिंह महाराज की वर्णित पंक्तियों में कहा कि श्रीराम की कथा युगों-युगों तक अमर है। जो श्रद्धा से इसका श्रवण और गायन करता है, उसके जीवन से दुख, पाप, आधि-व्याधि दूर होते हैं और उसे भक्ति तथा आंतरिक शांति की प्राप्ति होती है।
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