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कहीं फिर न झेलनी पड़े बाढ़ की मार, प्रभावित क्षेत्रों सुरक्षा कार्यों का इंतजार

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ऋषिकेश। उत्तराखंड में मानसून दस्तक देने जा रहा है। लेकिन ऋषिकेेश और डोईवाला तहसील में प्रशासन ने आपदा कंट्रोल रूम और बाढ़ चौकियों को बनाकर रस्म अदायगी कर दी है। बरसाती नदियों के आसपास के क्षेत्रों में भूमि कटाव को रोकने के लिए सिंचाई विभाग ने तटबंध और वायरक्रेट बनाने के कार्य भी शुरु नहीं किया है। अभी अधिकारी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का मौका मुआयना कर कार्यों एस्टिमेट तैयार कर रहे हैं। ऐसे में हर बार तहसील प्रशासनकी बाढ़ नियंत्रण की तैयारियों अधूरी रह जाती है और इसका खमियाजा लोगों को भुगताना पड़ता है।
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हर बार तैयार होता एस्टिमेट नहीं होते बाढ़ सुरक्षा कार्य
श्यामपुर। गुमानीवाला के रूसाफार्म, प्लांटेशन तथा बंगाला नाला प्रभावित क्षेत्र में बाढ़ का पानी भारी तबाही मचाता है। पिछले मानसून सीजन में यहां पर चार बीघा उपजाऊ भूमि का भी कटाव हो गया था और एक मकान में दरार आ गई थी। अब जबकि मानसून आ गया है। सिंचाई विभाग, वन विभाग की टीम ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया। यहां पर करीब 1400 मीटर का प्रस्ताव तैयार कर तकनीकी स्वीकृति के लिए भेजा गया है। ग्राम प्रधान दीपिका व्यास का कहना है कि मानसून आने वाला हैं ऐसे में प्रस्ताव भेजने का क्या औचित्य है। उधर, खैरीखुर्द (पांडे प्लॉट) में तो बाढ़ में एक मकान बहने की कागार पर है। यहां पर करीब सौ मीटर बाढ़ सुरक्षा का कार्य होना है। मगर, 15 साल से केवल एस्टिमेट ही बन रहा है। कहा जो स्टीमेट पहले सात लाख में बना था अब 30 लाख का हो गया है। वहीं भट्टोंवाला में छोटा बंगाला नाला और बड़ा नाला दोनों तांडव मचाते हैं। ग्राम प्रधान दीपा राणा ने कहा कि 2013 में आई बाढ़ से सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त हो गई थी। मगर, अभी तक उसको ठीक नहीं किया गया है।
उधर, श्यामपुर के भल्लाफार्म में क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रभाकर पैन्यूली करीब एक साल से लगातार बंगाला नाला में टूटे पुश्ते ठीक करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने इस संबंध में तत्कालीन एसडीएम को भी ज्ञापन दिया था। मगर, आठ साल से टूटे पुश्तों को ठीक नहीं कराया जा रहा है। उधर, खदरी में भी ग्राम प्रधान संगीता थपलियाल ने सौंग नदी में पुश्ता बनाने को लेकर विभाग को प्रस्ताव दिये हैं। प्रधान का कहना है कि कोई कार्य नहीं हुआ है। केवल जेसीबी लगाकर नदी को बीच में गहरा किया गया है।
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कोट
हमने बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए प्रस्ताव बना कर भेज दिये हैं। जैसे की स्वीकृति हो जायेगी तुरंत कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।
अविनाश रावत, अपर सहायक अभियता सिंचाई विभाग।
कटाव को रोकने के लिए धारा परिवर्तन का काम शुरू
अभी नहीं शुरू सौंग नदी पर तटबंध बनाने का काम
रायवाला। तहसील प्रशासन की ओर से बाढ़ संभावित ग्रामीण इलाकों में बाढ़ निगरानी चौकी बना दी गई है। जिसमें सबसे ज्यादा संवेदनशील गौहरीमाफी गांव में मां आंनदमयी स्कूल को बाढ़ चौकी बनाया गया है। इसके अलावा प्रतीतनगर और छिद्दरवाला पंचायत घर को भी बाढ़ चौकी बनाया गया है। सिंचाई विभाग की ओर से सबसे संवेदनशील गौहरीमाफी गांच सौंग नदी से होने वाले कटाव को रोकने के लिए मशीनों की मदद से धारा परिवर्तन का कार्य किया जा रहा है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दावा है कि तटंबध और वायरक्रेट निर्माण कार्य समय पर पूरा कर लिया जाएगा। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता कुलदीप सिंह ने बताया कि गौहरीमाफी गांव में सौंग नदी से होने वाले भूमि कटाव को रोकने के लिए नदी में मशीनों की मदद से धारा परिवर्तन का किया जा रहा है। नदी के मलवे से गांव की ओर दोहरी 10 फीट उंची की दीवार खड़ी की गई है। जिससे बाढ़ का पानी गांव में घुसने से रोकने में मदद मिलेगी। इसके अलावा चार जगहों पर पक्के तटबंध और तारजाल भरने का कार्य भी जल्द ही शुरू किया जाएगा।
कंट्रोल रूम तैयार, बाढ़ चौकियां बनाई
डोईवाला। मानसून के दृष्टिगत तहसील प्रशासन ने बाढ़ आपदा के क्षेत्रों के लिए बाढ़ सुरक्षा चौकियां स्थापित कर दी गई है। तहसील प्रशासन ने बाढ़ आपदा को लेकर अलर्ट हो रहा है। तहसील क्षेत्र डोईवाला की सुसवा, सौंग और जाखन नदी से होने वाले नुकसान को लेकर तहसील प्रशासन सक्रिय हो गया है। मानसून की अवधि में नदियों पूरे उफान पर आ जाती है। नदी तट पर आबादी क्षेत्रों के लिए खतरा बनती है। भूमि कटाव से लेकर आबादी तक पानी पहुंच जाता है। सुसवा नदी दूधली, कुड़कावाला बस्ती, सौंग नदी, राजीवनगर और केशवपुरी बस्ती और जाखन लालतप्पड़ आदि क्षेत्रों के आबादी वाले इलाको में परेशानी का सबब बन जाती है। यहां बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए सिंचाई विभाग एस्टिमेट तैयार कर रहा है। तहसील के रजिस्ट्रार कानूनगो एसएन गांगुली ने बताया कि तहसील में कंट्रोल रूम के अलावा चार बाढ़ चौकी बनाई गई है। बताया कि दूधली, माजरी ग्रांट और केशवपुरी बस्ती में दो बाढ़ चौकी बनाई गई है।
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