- वन विभाग की आरक्षित भूमि पर शुल्क वसूली का आरोप, सफाई और कूड़ा उठान नहीं होने से पर्यावरण पर भी उठे सवाल
ढालवाला। प्रसिद्ध साहसिक पर्यटन केंद्र निम बीच पर नगर पंचायत तपोवन की ओर से शुरू की गई तहबाजारी शुल्क वसूली व्यवस्था विवादों में घिर गई है। स्थानीय अस्थायी दुकानदारों का आरोप है कि नगर पंचायत प्रतिदिन शुल्क तो वसूल रही है लेकिन दुकानदारों और पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा रही। वहीं जिस क्षेत्र में शुल्क वसूला जा रहा है, वह वन विभाग की आरक्षित सीमा में आता है। वन विभाग का कहना है कि क्षेत्र का निरीक्षण कर कार्रवाई की जाएगी।
निम बीच क्षेत्र में करीब 10 दुकानों का संचालन किया जा रहा है। यहां नगर पंचायत तपोवन की ओर से तहबाजारी भी वसूली जा रही है। बावजूद इसके न तो यहां नगर पंचायत की ओर से सफाई की जा रही है और न ही नियमित रूप से कूड़ा उठवाया जा रहा है। दुकानदारों का कहना है कि क्षेत्र में नियमित सफाई और कूड़ा उठान की व्यवस्था नहीं है। इसके चलते दुकानों के आसपास कचरा और प्लास्टिक जमा हो रहा है। आरोप है कि कूड़ा उठाने की व्यवस्था नहीं होने के कारण कुछ दुकानदार उसे जलाने को मजबूर हैं। इससे गंगा तट के पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है। बताया जा रहा है कि जिस भूमि पर नगर पंचायत तहबाजारी वसूल रही है वह वन विभाग की भूमि है, यहां व्यावसायिक गतिविधियों और शुल्क वसूली के लिए संबंधित विभाग की अनुमति या अनापत्ति प्रमाणपत्र की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। वहीं दुकानदारों ने नगर पंचायत से शुल्क वसूली की व्यवस्था और इसके बदले उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। साथ ही निम बीच जैसे पर्यटन स्थल पर सफाई, कूड़ा निस्तारण, पेयजल और शौचालय की स्थायी व्यवस्था किए जाने की मांग उठाई है।
कोट
- कूड़े का उठान अलग से शुल्क लिए जाने के बाद ही किया जाएगा। नगर पंचायत दुकानदारों से केवल तहबाजारी शुल्क वसूल रही है। -अंजली रावत, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत, तपोवन
- निम बीच पर व्यावसायिक गतिविधियों की जानकारी नहीं है। स्थलीय निरीक्षण कर कार्रवाई की जाएगी। -दिंगत नायक, डीएफओ नरेंद्रनगर।