अर्द्धकुंभ नजदीक है। गंगा में बढ़ते प्रदूषण की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार और एनजीटी के द्वारा किए जा रहे प्रयासों को तीर्थनगरी में पलीता लगाया जा रहा है। त्रिवेणीघाट पर गंगातटों पर जगह-जगह पसरी गंदगी इसका तस्दीक करती है। बावजूद इस दिशा में जिम्मेदार एजेंसियां और जिला प्रशासन गंभीर नहीं हैं।
तीर्थनगरी की हृदयस्थली कहे जाने वाले त्रिवेणीघाट पर निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई गंगा द्वारा करीब सात करोड़ की लागत से सीवरेज पंपिंग स्टेशन स्थापित किए जाने के बावजूद नगर क्षेत्र के सीवर लाइनों का लीकेज दूषित जल मोक्षदायिनी में उड़ेला जा रहा है।
घाट के आसपास पांच सौ मीटर के दायरे में नदी के किनारे जगह-जगह कूड़े के डंप लगाए गए हैं। जो गंगा की मुख्य धारा में मिल रहा है। मगर नदी को स्वच्छ रखने के लिए सीधेतौर पर जिम्मेदार नगर निकाय, निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई गंगा, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन इसकी अनदेखी कर रहा है।
जिससे हर रोज यहां स्नान, आचमन, पूजन के लिए पहुंचने वाले लोग प्रदूषण से परेशान हैं। महज 15 दिन बाद अर्द्धकुंभ मेला शुरू होने को है। मगर नदी तटों पर पसरी गंदगी को हटाने और इसमें लगातार गिरने वाले मैले के स्थायी रोकथाम के लिए फिलवक्त कहीं कोई योजना सामने नहीं आई है। ऐसे में यह तय है कि कुंभ स्नान के लिए त्रिवेणी में जुटने वाले लाखों श्रद्धालुओं को मैली गंगा में पवित्र डुबकी लगानी होगी।
तट बन गए धोबीघाट, घाट पर सुखाए जा रहे कपड़े
त्रिवेणीघाट और इसके समीपवर्ती एक किमी का नदी का तट धोबीघाट बना हुआ है। जिसमें साबुन से कपड़े धोते लोग हररोज देखे जा सकते हैं। इतना ही नहीं घाट के किनारे बने तटबंध आदि क्षेत्र में धोए गए कपड़ों को बाकायदा सुखाया जा रहा है। मगर जिम्मेदार इस ओर आंखें बंद किए हुए हैं।
जन जागरूकता की योजना नहीं
गंगा में प्रदूषण रोकने के लिए जिम्मेदार महकमों ने नदी के किनारे कपड़े धोने, सुखाने और साबुन से नहाने वाले लोगों को जागरूक करने के लिए निगरानी तो दूर ऐसे स्थानों पर नोटिस बोर्ड तक नहीं लगाए हैं। जिसके कारण दिन के समय घाटों के आसपास कई जगह लोगों को साबुन से नहाते और कपड़े धोते देखा जा सकता है। इन्हें रोकने-टोकने वाला भी कोई नहीं है।
क्या कर रही है गंगा सभा
नगर निकाय ने त्रिवेणीघाट पर स्वच्छता की जिम्मेदारी पहले श्रीगंगा सेवा समिति को दी थी, मगर उसने इसकी ओर कभी गौर नहीं किया। बल्कि जिन शर्तों के आधार पर उसे यह प्लेटफार्म दिए गए उनसे इतर कार्य शुरू करा दिए। इसके बाद हाल में यह जिम्मेदारी गंगा सभा को सौंपी गई है। मगर हालात बता रहे हैं कि वह भी अपने मूल कार्य को नहीं कर रही है। नगर निकाय प्रशासन भी इस ओर लापरवाह बना हुआ है। वह न तो घाट की सफाई को लेकर गंभीर है और न ही इसके लिए जिम्मेदार एजेंसी से यह कार्य करा रहा है।