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प्रिवेणी तट पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

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कार्तिक पूर्णिमा के साल के अंतिम स्नान पर त्रिवेणी घाट समेत विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। हजारों श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद लक्ष्मी नारायण का पूजन और दान पुण्य कर परिवार के लिए सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना की। गंगा घाटों पर ब्रह्ममुहूर्त से शुरू हुआ स्नान का क्रम दिनभर जारी रहा।
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पौराणिक मान्यता है कि कार्तिक मास की पूर्णिमा पर देव गंगा स्नान के लिए धरती पर आते हैं। स्नान पर्व को देव दीपावली के रूप में भी मनाया जाता है। मंगलवार को ऋषिकेश, मुनिकीरेती और लक्ष्मणझूला क्षेत्र के गंगा घाटों पर ब्रह्ममुहूर्त से ही स्नान का क्रम शुरू हो गया था। शत्रुघ्न घाट, पूर्णानंद घाट, स्वामी नारायण घाट, लक्ष्मीनारायण घाट, संत सेवा घाट, भारत साधु समाज घाट, परमार्थ निकेतन आदि गंगा घाटों पर दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। लेकिन त्रिवेणी घाट पर सबसे अधिक संख्या में श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे।
सुबह 6.30 बजे से 7.00 बजे के आधे घंटे के शुभ मुहूर्त के बीच घाटों पर सर्वाधिक संख्या में श्रद्धालुओं ने स्नान किया। दोपहर 12 बजे से 1.00 बजे तक दूसरे मुहूर्त के कारण भी गंगा घाटों पर काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। शाम को 5.30 बजे के बाद घाटों पर भीड़ कुछ कम हुई। स्नान के दौरान मुख्य मार्ग के चौराहों और तिराहों पर अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात रहे। मुख्य मार्ग पर यातायात को नियंत्रित करने के सभी कट को बंद किया गया था।
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घाट रोड पर चौपहिया वाहनों को प्रवेश नहीं करने दिया गया। हालांकि मुख्य मार्ग पर वाहनों का दबाव अधिक न होने के चलते बाहरी वाहनों को डायवर्ट नहीं किया गया। गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जल पुलिस और आपदा राहत दल के जवान तैनात रहे। पुलिसकर्मी लोगों को सतर्क भी करते रहे।
श्रद्धालुओं ने रेलिंग से बाहर किया स्नान
त्रिवेणी घाट पर गंगा का जलस्तर कम था। रेलिंग के भीतर सीढ़ियों पर घुटनों से नीचे पानी था। ऐसे में श्रद्धालुओं ने रेलिंग से बाहर निकल कर स्नान करना पड़ा। पानी का जलस्तर कम होने के साथ जल धारा का वेग भी कम था। इसलिए श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। दिल्ली के श्रद्धालु राम रतन, हरियाणा के त्रिलोचन सिंह, शामली के निर्मल पाल ने कहा कि स्नान करते समय जलस्तर कम होने से काफी परेशानी हुई। श्रद्धालुओं ने कहा कि रेलिंग को नदी पर पर्याप्त जलस्तर तक लगना चाहिए।
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