नीलकंठ धाम में कांवड़ यात्रियों की आस्था और मंदिर की सुरक्षा दोनों के बीच जद्दोजहद देखने को मिल रही है। हर साल कांवड़ यात्रियों की संख्या कई गुना बढ़ रही है। कई किलोमीटर लंबी लाइन लगने के कारण बढ़ता दबाव प्रशासन के लिए भी चुनौतियां हैं। जलाभिषेक के दौरान सुरक्षा कर्मी तेजी से श्रद्धालुओं को आगे बढ़ाते हैं। भीड़ अधिक होने के कारण मंदिर के अंदर शिवलिंग और पिंडी पर कांवड़ यात्री पात्र का पूरा जल नहीं चढ़ा पाते हैं। कई बार वह मंदिर से बाहर निकलकर दीवारों पर बचा हुआ पानी छिड़क देते हैं। पानी से मंदिर की दीवारें खराब हो रही थीं। अब मंदिर प्रबंधन ने इस तरफ तिरपाल लगाकर दीवारों को ढक दिया है। अब कांवड़ यात्री तिरपाल के ऊपर ही जल चढ़ा रहे हैं। मंदिर परिसर में श्रद्धालु रेलिंग पर धागा बांधकर मन्नत भी मांगते नजर आ रहे हैं। पूरी रेलिंग धागों से पट चुकी है। कई श्रद्धालु यहां धूप-दीप भी जलाते दिख रहे हैं। गंगा नगर धर्मशाला के पीछे पैदल मार्ग पर पहले कांवड़ यात्री ऊपर से पानी की बोतलें फेंक देते थे। अब पुलिस ने इस स्थान पर करीब 100 मीटर लंबी लोहे की जाली लगवा दी है। नीलकंठ चौकी प्रभारी लक्ष्मण सिंह कुंवर ने बताया कि पहले मंदिर के पीछे गंगा नगर धर्मशाला की तरफ कांवड़ यात्रा के दौरान कूड़े के ढेर लगे रहते थे लेकिन अब जाली लगने से प्लास्टिक की बोतलें, डिब्बे एवं अन्य सामग्री नहीं फेंकी जा रही हैं। इससे साफ-सफाई भी बेहतर हुई है।