एसपीएस राजकीय चिकित्सालय में डेंगू के मरीजों के लिए आइसोलेशन वार्ड तैयार किया गया है। अस्पताल के द्वितीय और तृतीय तल में चार-चार बेड के दो आइसोलेशन वार्ड हैं। लेकिन अस्पताल में प्लेटलेट्स की उपलब्धता न होने के चलते मरीजों को उपचार ही नहीं हो पाएगा। अस्पताल के ब्लड बैंक में प्लेटलेट यूनिट बनाने के लिए कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट ही नहीं है।
बरसात के मौसम में इन दिनों जगह-जगह जलभराव है। गंदे पानी में डेंगू के मच्छर और उनका लार्वा पनपता है। इससे लोगों में डेंगू संक्रमण का खतरा बना रहता है। डेंगू के मरीजों के लिए सरकारी अस्पताल में द्वितीय तल महिला वार्ड और तृतीय तल पुरुष वार्ड में चार-चार बैड का आइसोलेशन वार्ड तैयार किया गया है। इन वार्डों में मच्छरदानी समेत विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध हैं।
अस्पताल के लैब में एंटीजन और एलाइजा जांच भी उपलब्ध है। लेकिन जांच के दौरान अगर कोई मरीज डेंगू संक्रमित मिलता है तो अस्पताल में उसका उपचार नहीं है। डेंगू संक्रमित मरीज के खून में प्लेटलेट्स में गिरावट आती है। इसको नियंत्रित करने के लिए मरीज में प्लेटलेट्स यूनिट चढ़ाई जाती है। लेकिन यह तभी संभव है जब अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेट सेपरेटर मशीन उपलब्ध हो। अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन ही नहीं है। यहीं कारण यहां केवल डेंगू आशंकित मरीज ही भती होते हैं। डेंगू मरीजों को एम्स अस्पताल में बेड न मिलने के चलते प्लेटलेट्स यूनिट चढ़ाने के लिए मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है।
क्या है कंपोनेंट सेपरेटर मशीन
यह मशीन लाल रक्त कणिकाएं (आरबीसी), श्वेत रक्त कणिकाएं (डब्लूबीसी), फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (एफएफपी) और प्लेटलेट्स को अलग-अलग कर देता है। ऐसे स्थिति में मरीज को खून चढ़ाने की बजाया आवश्यक कंपोनेंट ही चढ़ाया जाता है। एक यूनिट खून में से चार मरीजों की जिंदगी बचाई जा सकती है। यह सब कंपोनेट सेपरेटर मशीन से संभव है।
ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन के लिए निदेशालय को पत्र लिखा गया है। ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन उपलब्ध होते ही प्लेटलेंट निर्माण का काम शुरू कर दिया जाएगा।
पीके चंदोला, प्रभारी सीएमएस।