‘जाको राखे साइयां मार सके न कोय’ कहावत उस समय चरितार्थ हुई, जब प्राइवेट अस्पताल में भर्ती मरीज विजय के तीमारदारों को डॉक्टर ने यह कह दिया, यह अब चंद घंटों का मेहमान है। परिजन मरीज को घर ले आए। रिश्तेदार और आसपास के लोगों का जमावड़ा लग गया। मरीज में कोई हरकत न होने पर उसे मृत समझ अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए। तभी मरीज ने कराहते हुए करवट बदली। लोग चौंक गए और आननफानन में सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे।
पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक एसपीएतस राजकीय चिकित्सालय में संविदा कर्मी 44 वर्षीय विजय थपलियाल निवासी गंगानगर को बीमार थे। उन्हें बीते आठ अक्तूबर को हिमालयन अस्पताल, जौलीग्रांट में भर्ती कराया गया। आईसीयू में हालत में सुधार न होने पर बुधवार की सुबह चिकित्सक ने परिजनों को बताया कि विजय की बचने की उम्मीद कम है। वेंटीलेटर के सहारे ही सांस चल रही हैं।
मरीज के फुफेरे भाई प्रवेश जोशी ने बताया कि एक तरह से डॉक्टर ने मौखिक रूप से मृत करार दिया। मामले की जानकारी अस्पताल स्टाफ और रिश्तेदारों को दी। सभी जौलीग्रांट पहुंचे और दोपहर में मरीज को घर ले आए। मरीज को हरकत में नहीं देख सभी रोने बिलखने लगे। माहौल पूरी तरह से गमगीन हो गया, तभी मरीज ने करवट बदली। लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं।
अस्पताल में लगा जमावड़ा
मरीज के करवट बदलते ही परिजन चौंक गए और सरकारी अस्पताल की हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. ऋचा रतूड़ी को घर पर बुलाया। डॉ. ने जांच के बाद मरीज को सीधे अस्पताल पहुंचाने की सलाह दी। मरीज के सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी कक्ष पहुंचते ही पीछे से लोगों की भीड़ भी उमड़ पड़ी। हर कोई हतप्रभ था। देर शाम तक लोग मरीज का हाल जानने के लिए अस्पताल में ही मौजूद रहे। वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष पंत ने बताया कि फिलहाल मरीज की पल्स और नब्ज सामान्य है। उपचार चल रहा है 24 घंटे बाद सुधार की संभावना है।
शोक में अस्पताल में छुट्टी
हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट में भर्ती संविदा कर्मी की मौत की खबर मिलते ही शोक के चलते सरकारी अस्पताल में छुट्टी कर दी गई। अस्पताल कर्मियों ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धाजंलि दी। शोक के चलते एक घंटा पहले ही डाक्टरों के कक्ष से उठने और दवा वितरण केंद्र बंद होने से मरीजों और उनके तीमारदारों को परेेशानी भी हुई।