ऋषिकेशढालवाला। पितृ पक्ष के अंतिम दिन यानी सर्वपितृ अमावस्या पर मुनि की रेती, स्वर्गाश्रम और ऋषिकेश के विभिन्न गंगा घाटों पर आस्था और परोपकार का अनूठा संगम देखने को मिला। दिवंगतों की आत्मिक शांति और मोक्ष की कामना के साथ श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में डुबकी लगाई और विधि-विधान से तर्पण, पिंडदान व श्राद्ध कर्म किए।
शास्त्रों में पितृ पक्ष के समापन पर दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने घाटों पर बैठे जरूरतमंदों, साधु-संतों और गरीबों को अन्न, वस्त्र, फल और दक्षिणा का दान किया। मान्यता है कि पितृ पक्ष के अंतिम दिन किया गया दान सीधे हमारे पूर्वजों तक पुण्य के रूप में पहुंचता है। कई सामाजिक संस्थाओं और परिवारों ने मिलकर भंडारे और अन्नदान का आयोजन भी किया। त्रिवेणी घाट से लेकर मुनि की रेती के प्रमुख घाटों तक सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया था। लोगों ने अपने पितरों के नाम पर ब्राह्मण भोजन और असहायों की सहायता कर उनके प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। इस दौरान पूरा क्षेत्र दिवंगतों की स्मृतियों और परोपकार के भाव से सराबोर नजर आया।
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त्रिवेणी घाट पर अन्न की बर्बादी से गंदगी
ऋषिकेश। त्रिवेणी घाट पर तर्पण और पिंडदान के नाम पर खाद्य सामग्री गंगा तट पर छोड़े जाने से गंदगी फैल रही है। सामाजसेवी राघवेंद्र भट्टनागर ने बताया कि धर्म और शास्त्रों में भी अन्न की बर्बादी का समर्थन नहीं किया गया है। पूर्वजों के नाम पर दान या भोजन अर्पित करने का उद्देश्य भूखों और जरूरतमंदों की सेवा होना चाहिए। तर्पण या श्रद्धा कार्यों में सीमित मात्रा में सामग्री का प्रयोग करें और बचे हुए शुद्ध अन्न को जरूरतमंदों या गरीबों में वितरित करें, ताकि अन्न का सम्मान भी सुरक्षित रहे और त्रिवेणी घाट की पवित्रता और स्वच्छता भी बनी रहे।
त्रिवेणी घाट पर जाम से श्रद्धालु परेशान
ऋषिकेश। त्रिवेणी घाट पर पितृ पक्ष और बड़े पर्वों के दौरान लगने वाला जाम गंभीर समस्या बन गया है। अतिक्रमण, सड़क तक फैला दुकानदारों का सामान और बेतरतीब खड़े चौपहिया वाहनों से मुख्य बाजार की 10 से 12 फीट चौड़ी सड़कें सिमटकर 5 से 7 फीट रह जाती हैं। स्थानीय निवासी मोहन शर्मा का कहना है कि प्रशासन की ओर से ठोस यातायात व्यवस्था लागू नहीं होने से श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और व्यापारियों को परेशानी उठानी पड़ती है।