ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेेश। रॉफ्टिंग कंपनियां पर्यटकों से राफ्टिंग के नाम पर मोटा पैसा वसूल रही हैं, लेकिन सुरक्षा की तरफ ध्यान देने को कोई भी तैयार नहीं है। रविवार को एक ऐसा ही मामला सामने है। एक राफ्ट अत्यधिक विलंब से गंगा में तैर रही थी। जबकि नियमानुसार सूर्यास्त के बाद राफ्टिंग पर पूर्ण तौर पर पाबंदी है। मुनिकीरेती पुलिस ने पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राफ्ट संख्या 155 पर 5000 रुपये जुर्माना लगाया। मुनिकीरेती पुलिस ने आगामी यात्रा सीजन को देखते हुए क्षेत्र में राफ्ट चालकों को रोक कर चेकिंग की। इस दौरान एक राफ्ट के अत्यधिक विलंब से पहुंचने पर जुर्माना वसूला।
थानाध्यक्ष मुनिकीरेती राम किशोर सकलानी ने बताया कि अगले माह की शुरूआत में यात्रा सीजन आरंभ हो रहा है। इसी के चलते रविवार को दुर्घटनाओं से बचाव के लिए सूर्यास्त के पश्चात चलने वाली रॉफ्ट चालकों को जल पुलिस की मदद से नीम बीच पर रोक लिया। इस दौरान अधिकतर राफ्ट को चालकों ओर यूनियन की ओर से विलंब के कारणों से संतुष्ट होने पर भविष्य के लिए चेतावनी दी, जबकि एक राफ्ट संख्या 155 से अत्यधिक विलंब से पहुंचने पर जुर्माना लगाया गया। बता दें कि पिछले तीन माह में रॉफ्टों से आधा दर्जन दुर्घटनाएं हुई हैं इनमें से दो व्यक्तियों की मृत्यु हुई है। इस संबंध में एक मामले में थाना मुनिकीरेती पर अभियोग पंजीकृत वर्तमान में विवेचना प्रचलित है। कार्रवाई के दौरान वरिष्ठ उप निरीक्षक संजीत कुमार भी मौजूद रहे।
सीसीटीवी के भी कोई इंतजाम नहीं
राफ्टिंग करने वाले पर्यटक से गंगा नदी राफ्टिंग रिवर समिति 20 रुपये की पर्ची काट रही है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर कहीं भी सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए हैं। प्रत्येक शनिवार और रविवार को करीब 50 हजार पर्यटक तीर्थनगरी पहुंचते हैं। पर्यटकों से लाखों रुपये वसूलने के बावजूद सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए जा रहे। पुलिस की मानें तो कई बार बदमाश कारों के शीशे तोड़कर सामान चोरी कर लेते हैं, सीसीटीवी कैमरे न होने के कारण बदमाशों का पता लगाना मुश्किल होता है।
कैंपों में डीजे पर पाबंदी
थानाध्यक्ष राम किशोर सकलानी ने बताया कि क्यारकी निवासियों की शिकायत पर पुलिस ने क्यारकी स्थित कैंपों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस ने कैंपों में किसी भी प्रकार का डीजे अथवा ध्वनि प्रदूषण न करने की हिदायत दी। उन्होंने बताया कि कैंपों में अब डीजे पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहेगा। कैंप संचालकों और ग्रामीणों के मध्य आए दिन विवाद हो रहे हैं, इसमें डीजे प्रमुख रूप से विवाद की जड़ है। थानाध्यक्ष ने बताया कि जांच में पाया गया कि कैंपों में प्रतिदिन शाम ढलते ही रात 12 बजे तक तेज आवाज में डीजे बजाए जा रहे हैं। इस कारण छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जिसे ध्यान में रखते हुए डीजे का प्रयोग करने पर पूर्ण रुप से प्रतिबंध लगा दिया गया है।