पहाड़ों से का दर्द कवियों ने रचनाओं के माध्यम से प्रस्तुत किए। साथ ही उन्होंने नोटबंदी के कारण जमाखोरों और भ्रष्टाचारियों पर तंज कसे। कवियों ने राजनेताओं द्वारा वोट मांगने पर हास्य और व्यंग्य रचनाएं सुनाकर श्रोतागणों को लोटपोट किया।
श्यामपुर स्थित नव चेतना विद्यालय में मंगलवार को लोकभाषा गढ़वाली कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि कमला प्रसाद भट्ट, अतिविशिष्ठ अतिथि जय सिंह रावत, विशिष्ठ अतिथि राजपाल पंवार और स्कूल प्रबंधक अनिल नवानी ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर स्कूली छात्रा द्वारा सरस्वती वंदना की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। इस दौरान कवि नरेंद्र रयाल ने बणै था परधान जी, लिखै पढ़ौं कि, करला विकास पुले पतै कि..., सत्येंद्र चौहान ने अब नि सयेदा, अब नि सुणेंदा, रोज का ताना बाना रै..., के साथ बोडी का पहली बार शहर में करवाचौथ हास्य रचना सुनाई।
कवियत्री बीना कंडारी ने ना धरती कैकि, ना आगास कैकि ना बयार..., लोकेश नवानी ने दग्डया हम छकना छवां अफु तै ही हर बार.., कविता प्रस्तुत की। राकेश मोहन ध्यानी ने चुनाव पर रचना-चुनाव च बल, चुनाव च बल..., से राजनेताओं पर तंज कसे।
शांति प्रसाद जिज्ञासु ने खौकयेग्यों मी बाढू देखी, ई बग्वाल मामी नि ऐ तू, रचना सुनाकर पहाड़ का दुख बयां किया। देवेंद्र उनियाल ने कन होंदिब्वे नौना पर जब जोट लगदि, नौना दगडी रौंदि वे..., मदन ढुकलान ने सुद्धि-बुद्धि खामाखा..., कविताएं सुनाईं।
हेमवती नंदन भट्ट (हेमूू) जी ने कोल्ड्रिंग बियरबार पाड़ डांडा वारवार कच्ची न पक्कयूंकि बार मैनिफैक्चरिंग बहार डेवलपमेंट 2020 मां रचना सुनाकार पहाड़ के विकास की बात की। इस मौके पर श्यामुपर प्रधान शाकुंभरी बिष्ट, रूपानंद भट्ट, स्कूल प्रधानाचार्या नीलम नवानी, मैती स्वयं सेवी संस्था अध्यक्ष कुसुम जोशी, डा. विक्रम अलंकार आदि मौजूद रहे।