उत्तराखंड आयुर्वेद विवि से संबद्ध निजी संस्थानों पर विश्वविद्यालय की सख्ती, 15 दिन में रिपोर्ट सौंपेंगी निरीक्षण टीमें, गड़बड़ी मिली तो कॉलेज के साथ प्रोफेसरों पर भी कार्रवाई
राजीव खत्री
ऋषिकेश। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय से संबद्ध निजी संस्थानों में प्रवेश और मानकों के लिए चल रहे विवाद के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब कॉलेजों की व्यवस्थाओं और आधारभूत ढांचे की सख्त जांच शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय की ओर से 19 अलग-अलग टीमों को संस्थानों के औचक निरीक्षण के लिए भेजा गया है। करीब 10 दिन से चल रही इस प्रक्रिया में कॉलेजों में भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग, राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (एनसीआईएसएम) के निर्धारित मानकों, उपलब्ध सुविधाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर और विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए जरूरी व्यवस्थाओं की पड़ताल की जा रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक निरीक्षण टीमों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि केवल कागजों में उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर कॉलेजों को मान्यता या काउंसलिंग में प्रवेश की अनुमति न दी जाए। मौके पर उपलब्ध संसाधनों की जांच के साथ तस्वीरें और अन्य साक्ष्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। निरीक्षण पूरा होने के बाद 15 दिन के भीतर रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सौंपनी होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस बार निरीक्षण प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। विवि के कुलसचिव डॉ. एसके बर्नवाल ने स्पष्ट किया है कि यदि निरीक्षण टीम के किसी सदस्य की ओर से कोई लापरवाही या किसी अन्य दबाव में गलत रिपोर्ट लगाए जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, यदि दोबारा निरीक्षण में पहले दी गई रिपोर्ट गलत पाई गई तो संबंधित निरीक्षण टीम भी जवाबदेह होगी।
मानक पूरे नहीं तो काउंसलिंग में प्रवेश पर रोक
विवि के कुल सचिव डॉ. एसके बर्नवाल ने बताया कि निरीक्षण में यदि कोई संस्थान एनसीआईएसएम के निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो उसे काउंसलिंग प्रक्रिया में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन पहले ही कई संस्थानों को नोटिस जारी कर चुका है। वहीं उत्तरकाशी जनपद के एक संस्थान की मान्यता समाप्त किए जाने की कार्रवाई भी की जा चुकी है। आने वाले दिनों में यदि अन्य संस्थानों में भी गंभीर कमियां पाई गईं तो उनकी मान्यता समाप्त करने व डी-एफिलिएशन की कार्रवाई की जा सकती है।
विवाद के बाद भी नहीं मान रहे कॉलेज
निजी कॉलेजों में गैर-काउंसलिंग के माध्यम से हुए प्रवेश पर वर्ष 2018-19 से 2021-22 तक के कई बैच विवादों में हैं। इससे करीब 500 छात्र प्रभावित हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि निर्धारित सीटों पर काउंसलिंग से विद्यार्थी नहीं मिलने के बावजूद कुछ कॉलेजों ने कथित तौर पर अपनी ओर से विद्यार्थियों को प्रवेश दे दिया। इसके बाद नामांकन, परीक्षा और परिणाम पर मामला न्यायालय तक पहुंचा। कुछ मामलों में न्यायालय ने विद्यार्थियों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी लेकिन परिणाम को अंतिम निर्णय तक रोकने जैसी शर्तें भी लगाई गईं। बावजूद इसके कई कॉलेज अभी भी नियम विरुद्ध प्रवेश दे रहे हैं। कुलसचिव डॉ. एसके बर्नवाल ने बताया कि वर्ष 2024 में भी दो कॉलेजों में कथित रूप से नियम विरुद्ध प्रवेश का मामला सामने आया था। इस मामले में न्यायालय और बाद में सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा। इस बैच के करीब 70 से 80 विद्यार्थी प्रभावित हैं।