इसे कुदरत का करिश्मा कहें या संयोग, आखिरकार एक बेटे को 14 वर्ष बाद बिछड़े पिता का प्यार और दुलार मिल गया। पिता के मिलने की खुशी से बेटे की आंखें छलर्क आइं, तो भी पिता भी अपने जज्बातों को काबू में नहीं रख पाए। सोमवार को वर्षों बाद पिता और पुत्र के मिलन के दौरान वहां मौजूद लोगों की आंखें भी भर आईं।
14 साल पहले कैसे एक बेटे अपने पिता से अलग हुआ था, उसी बेटे की जुबानी उसकी दास्तां सुनिए...
बिछड़े बेटे अजय (18) ने बताया कि जब वह करीब पांच वर्ष का था तब उसकी मां गृह क्लेश के चलते वर्ष 2002 में उसे स्वर्गाश्रम ले आईं। कुछ दिनों बाद मां का आकस्मिक निधन हो गया। मैं और मेरे तीन भाइयों को गंगा तट पर रोता बिलखता देख स्वर्गाश्रम निवासी मनोहर सिंह ने गोद ले लिया।
इतना प्यार दिया कि हम लोग उन्हें ही अपना पिता मानने लगे। हालांकि, मनोहर सिंह अब जीवित नहीं हैं। बकौल अजय सबसे छोटे भाई को किसी परिवार ने गोद ले लिया था, जिसका अभी तक कोई पता नहीं है। समय कब बीता पता नहीं चला।
वर्तमान में अजय का एक भाई हिमांशु बंदेमातरम कुंज में इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रहा है और दूसरा भाई विजय गुरुकुल कांगड़ी में बीए प्रथम वर्ष का छात्र है। इस दौरान अजय स्वर्गाश्रम क्षेत्र में स्व. मनोहर की दुकान में पढ़ाई के साथ-साथ काम करने लगा। इंटरमीडिएट और योगाचार्य परीक्षण के बाद अजय देस विदेश में यात्री और पर्यटकों को योग की शिक्षा देने लगा।
बकौल अजय चार महीने पहले वह किसी काम से ज्वालापुर गया। इस दौरान उसे हल्का फुल्का याद आया कि इस गली में उसके मामा संजय गांधी की दुकान हुआ करती थी। पता करने पर अजय ने अपने मामा को ढूंढ निकाला।
पूरी जानकारी देने के बाद मामा ने पिता खरेड़ी जनता रोड सहारनपुर निवासी मानसिंह से संपर्क किया। बिछड़े बेटों की खबर सुनकर दिल्ली में रेलवे में कार्यरत पिता बेटों से मिलने सहारनपुर पहुंचे। मंगलवार को सहारनपुर में बेटे से मिलने के बाद पिता ने खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
बबलू ने दिया पूरा साथ
अजय को पिता से मिलाने के लिए स्वर्गाश्रम निवासी स्व. मनोहर सिंह के बेटे प्रमोद उर्फ बबलू ने पूरा साथ दिया। एक बेटे को उसके पिता से मिलाने के लिए बबलू की मेहनत खूब काम आई। बबलू ने बताया के उन्होंने अजय को अपने भाई की तरह प्यार दिया है। स्वर्गाश्रम में उन्होंने अपनी दुकान की पूरी जिम्मेदारी अजय को सौंपी हुई थी। अजय से उनका 14 वर्ष का लगाव भूला नहीं जाएगा।