फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जन्मजात दिल की बीमारियों से ग्रसित बच्चों को बोझ न समझें : प्रो. मीनू

विज्ञापन
विज्ञापन
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग ने एक वर्ष में 40 से अधिक बच्चों में दिल की जन्मजात बीमारियों का सफल इलाज कर उन्हें जीवनदान दिया है। जिसको लेकर विभाग में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। चिकित्सकों ने ऐसे कुछ बच्चों को खेल-खिलौने देकर पुरस्कृत किया।
विज्ञापन


एम्स में जन्मजात दिल की बीमारियों से ग्रसित छोटे बच्चों का इलाज किया जा रहा है। ठीक होने के बाद अधिकांश बच्चे अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहे। ऐसे बच्चों को सीटीवीएस विभाग की ओर से एक कार्यक्रम के तहत सम्मानित किया गया।
संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि अभिभावक जन्मजात दिल की बीमारियों से ग्रसित बच्चों को बोझ न समझें। बच्चे भगवान का रूप होते हैं। जन्मजात बीमारियों का समय रहते इलाज करवा दिया जाए तो आगे चलकर ऐसे बच्चे भी खुशहाल जीवन जी सकते हैं।
विज्ञापन


कहा कि दिल की जन्मजात बीमारियों वाले बच्चों का एम्स में संपूर्ण इलाज उपलब्ध है। यह इलाज सरकार की योजना के तहत निशुल्क किया जाता है। सीटीवीएस विभाग की एडिशनल प्रोफेसर डाॅ. नम्रता गौर ने बताया कि जन्मजात बीमारियों में शरीर का रंग अचानक नीला पड़ता है और दिल में छेद का होना प्रमुख हैं। दोनों ही बीमारियां घातक हैं और गंभीर किस्म की हैं।
बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान विभाग की ओर से ऐसे लक्षणों वाले 40 से अधिक बच्चों का इलाज किया जा चुका है। ऐसे बच्चों का तीन वर्ष की उम्र से पहले इलाज करवा देना चाहिए, अन्यथा इलाज के अभाव में आगे चलकर उनका जीवन खतरे में पड़ सकता है।

दौरान डाॅ. अनीश गुप्ता ने बच्चों का स्वास्थ्य संबंधी फाॅलोअप लिया। साथ ही अभिभावकों से बच्चों के स्वास्थ्य की विस्तृत जानकारी लेकर उन्हें आवश्यक परामर्श भी दिया। इस मौके पर डीन एकेडेमिक प्रो. जया चतुर्वेदी, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. संजीव मित्तल, उप निदेशक (प्रशासन) ले. कर्नल अमित पराशर, विभाग के हेड डाॅ. अंशुमान दरबारी, डाॅ. संतोष कुमार, डाॅ. प्रतीक पाण्डा, डाॅ. यश श्रीवास्तव, डाॅ. दानिश्वर मीणा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें