भानियावाला से ऋषिकेश के बीच फोरलेन सड़क निर्माण अब अधर में लटक गया है। हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटान पर रोक लगा दी है। करीब 600 करोड़ की लागत से 21 किमी फोरलेन मोटर मार्ग का निर्माण किया जाना था।
भानियावाला से ऋषिकेश तक सड़क चौड़ीकरण कर इसे फोरलेन बनाए जाने के लिए वर्ष 2022 में डीपीआर तैयार की गई थी। भूमि हस्तातंरण व वन विभाग की अन्य प्रक्रियाओं में एनएचएआई को पूरे दो साल लगे थे। सड़क चौड़ीकरण के लिए भानियावाला बाजार में ध्वस्तीकरण भी किया गया था। ध्वस्तीकरण के बाद फोर लेन के लिए टेंडर जारी किए गए थे।
एनएचएआई ने रानीपोखरी में डांडी से लेकर नटराज चौक से पहले वन विभाग के बैरियर तक मार्ग चौड़ीकरण के लिए पेड़ों की कटान की मंजूरी भी भारत सरकार से ली थी। इस 21 किमी के दायरे में करीब 3300 पेड़ काटने थे। इनका इन दिनों लाॅपिंग भी की जा रही थी। इसी बीच जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटान पर रोक लगा दी है। इससे सड़क चौड़ीकरण का कार्य अधर में लटक गया है।
40 हेक्टेयर भूमि पर होना है 36 हजार पौधरोपण
सड़क चौड़ीकरण में वन विभाग की करीब 20 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हो रही है। इसमें 3300 पेड़ों की कटान होनी थी। इसके एवज में एनएचएआई ने वन विभाग को रायपुर के समीप करीब 40 हेक्टेयर गैर वन भूमि दी है। इसमें 36500 पौधरोपण किया जाना है। इसके लिए वन विभाग को एनएचएआई ने नाै करोड़ की धनराशि भी दी है, जिसमें 10 साल का रख-रखाव भी शामिल है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक पंकज मोर्य ने कहा कि सड़क के चौड़ीकरण में वन विभाग की 20 हेक्टेयर भूमि प्रभावित हो रही है। इसमेंं 10 हेक्टेयर पर पहले से ही सड़क है। वास्तविक रूप से 10 हेक्टेयर ही प्रभावित हो रही है। जिसके एवज में वन विभाग को 40 हैक्टेयर भूमि दी गई है।
वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड से कराया अध्ययन
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण डोईवाला खंड के परियोजना निदेशक पंकज मौर्य ने बताया कि इस पूरे क्षेत्र का वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) से अध्ययन कराया गया। क्योंकि, यह हाथी कोरिडोर क्षेत्र है। यहां डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने ट्रैप कैमरे लगाकर अध्ययन किया कि हाथियों की सबसे अधिक मूवमेंट कहा है। किस रास्ते पर जाते हैं और कहां जाते हैं। इस अध्ययन के आधार पर इस क्षेत्र में पांच हाथी अंडर पास भी बनाए गए हैं।
सात मोड़ को भी किया जाना था सीधा
ऋषिकेश और एयरपोट के बीच दुर्घटना के लिए संवेदनशील सात मोड़ वाला क्षेत्र में इस योजना में सीधा होना है। एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि ऋषिकेश से एयरपोर्ट के बीच 9 किमी के इस दायरे में पांच एलीफेंट अंडर पास भी बनाए जाने हैं। अंडर पास बनने से हाथियों की आवाजाही निर्बाध रूप से हो सकेगी। हाथी सड़क पर नहीं आएंगे। हाथियों की आवाजाही से सड़क पर यातायात भी प्रभावित नहीं होगा साथ हाथियों की दहशत भी कम होगी।
इस संबंध में कोई जानकारी नही है। अभी हमें इस संबंध में कोई नोटिस नहीं आया है। नोटिस आने पर विभाग अपना पक्ष रखेगा।
-पंकज मौर्य,
परियोजना निदेशक, एनएचएआई।