एम्स में कैंसर चिकित्सा एवं रुधिर विज्ञान विभाग की पहल पर हेड-नेक कैंसर जागरूकता माह के तहत कार्यक्रम आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि जागरूकता, संयम और समय पर जांच आदि उपाय ही कैंसर के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार हैं।
बुधवार को आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ एम्स निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि हेड-नेक कैंसर केवल एक चिकित्सकीय समस्या नहीं है, बल्कि हमारी जीवनशैली का परिणाम है। यदि समय रहते जागरूकता और सावधानी बरती जाए, तो इस गंभीर बीमारी से बचाव संभव है।
कैंसर चिकित्सा एवं रुधिर विज्ञान विभाग के सह आचार्य एवं कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित सहरावत ने कहा कि सिर और गर्दन का कैंसर आज भारत में तेजी से एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। पहले यह बीमारी मुख्यतः 50 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब युवाओं में इसके मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, जो कि चिंता का विषय है।
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आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
डॉ. सहरावत ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (ग्लोबोकेन- 2022) की रिपोर्ट में उल्लिखित है कि भारत में कुल 14.6 लाख से अधिक नए कैंसर मामले सामने आए हैं, जबकि कैंसर ग्रसित 9.1 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु हुई। इन मामलों में लिप एवं ओरल कैविटी कैंसर के 1.43 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जो पुरुषों में सबसे आम तथा कुल मिलाकर दूसरा सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मुंह, गले एवं स्वरयंत्र से जुड़े सभी कैंसरों को मिलाकर हेड-नेक कैंसर भारत में कुल कैंसर भार का लगभग 30 प्रतिशत है, जो इसे देश का सबसे बड़ा कैंसर समूह बनाता है।