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सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का 90 प्रतिशत कार्य पूरा

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लक्कड़ घाट पर एसटीपी प्लांट का निरीक्षण करते नमामि गंगे के महाप्रबंधक केके रस्तोगी। - फोटो : RISHIKESH
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ऋषिकेश। ऋषिकेश के लक्कड़ घाट पर बन रहे 26 एमएलडी के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। यह ट्रीटमेंट प्लांट लगभग डेढ़ सौ करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। 31 जनवरी 2020 को यह प्लांट शुरू हो जाएगा। विभागीय अफसरों का कहना है कि प्लांट का शुभारंभ करने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ सकते हैं।
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बता दें, पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट देश का दूसरा प्लांट है। इससे पहले हरिद्वार में इस तरह के प्लांट की शुरुआत हो चुकी है। लगभग पांच हेक्टेयर की भूमि पर तैयार हो रहे 26 एमएलडी की क्षमता का इको फ्रेंडली प्लांट निर्माण अंतिम चरण में है। इस प्लांट का कार्य 90 फीसदी पूरा हो चुका है। बाकी शेष बचे कार्य को भी लगभग एक माह के भीतर पूरा करने के बाद इस प्लांट को शुरू कर दिया जाएगा। इसी क्रम में नमामि गंगे के महाप्रबंधक केके रस्तोगी ने मंगलवार को प्लांट की प्रगति का जायजा लिया। केके रस्तोगी ने बताया कि यह देश का दूसरा ऐसा प्लांट है जो कि पूरी तरह ऑटोमोड में संचालित होगा। ट्रीट किए गए पानी को सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जा सकेगा। अमूमन इतने विस्तृत प्लांट को शुरू करने में लगभग चार वर्ष का समय लगता है। अवधि के मामले में भी इस प्लांट ने नजीर पेश की है। यह प्लांट मात्र दो वर्षों के भीतर बनाकर तैयार किया गया है।
स्क्रीन पर देखी जा सकेगी पानी में आक्सीजन की मात्रा
ऋषिकेश। लक्कड़ घाट में तैयार हो रहे एसटीपी का संचालन पूरी तरह ऑटोमोड होगा। यहां लगे स्क्रीन पर देखा जा सकेगा कि ट्रीट किए गए पानी में ऑक्सीजन की मात्रा क्या है। पूरी तरह कंप्यूटराज्ड होने के कारण दिल्ली में बैठे अफसर भी इस प्रोजेक्ट के जल की गुणवत्ता की निगरानी कर सकेंगे। कंपनी प्लांट शुरू होने के बाद अगले 15 साल तक देखरेख और संचालन का काम करेगी। इस दौरान जल की गुणवत्ता की कमी पाई गई तो कंपनी पर भारी जुर्माना ठोंकने का भी प्रावधान है।
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बढ़ती आबादी को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया प्रोजेक्ट
ऋषिकेश की वर्तमान आबादी करीब 1.5 लाख है। इस प्लांट को अगले बीस वर्षों में आबादी के घनत्व को ध्यान में रखकर मूर्तरूप दिया जा रहा है। खास पहलू ये है कि ऋषिकेश में चारधाम यात्रा के दौरान करीब एक लाख से अधिक लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। नमामि गंगे परियोजना के महाप्रबंधक ने बताया कि लक्कड़घाट स्थित यह सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तकनीकी तौर पर बेहद खास है। यह प्लांट ईको फ्रेंडली है। साथ ही इस प्लांट से निकलने वाला पानी काफी साफ रहेगा। सिचाई के लिए भी इस पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। महाप्रबंधक ने बताया कि प्लांट शुरू होने के बाद शुद्ध पानी सीधे गंगा में प्रवाहित किया जाएगा। इसके अलावा सिंचाई विभाग से भी वार्ता हुई है कि वे चाहें तो शोधित पानी को सिंचाई के उपयोग में ला सकते हैं। जब तक सिंचाई विभाग अपना प्रबंध नहीं करता है ट्रीट किया हुआ पानी गंगा प्रवाहित किया जाएगा।
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