वन सीमाओं से सटे गांवों के काश्तकारों की फसलों को पहले वन्य जीवों ने बर्बाद किया। अब उनको वन विभाग के नियम रुला रहे हैं। विभाग की ओर से उनसे मुआवजा के लिए बर्बाद फसल के साथ प्रधान की फोटो गवाही के तौर मांगी जा रही है। किसानों का कहना है कि वन विभाग ने नियमों में बदलाव काफी पहले किया, लेकिन इसका प्रचार प्रसार नहीं किया गया। जिस कारण उनको पता नहीं चला। अब उनके पास फोटो न होने से दिक्कत आ रही है।
दरअसल, आठ सौ रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से फसली मुआवजा पाने को किसानों को प्रधान की संस्तुति और क्षेत्रीय लेखपाल की जांच आख्या के साथ दर्जनों कागजात संबंधित रेंज कार्यालय में जमा कराने होते हैं। इस मुआवजे को आने में भी करीब एक साल लग जाता है। अब वन विभाग ने नियमों को और जटिल बना दिया हैं, जिससे किसानों की समस्या बढ़ गई है।
नए नियमों के अनुसार आधार कार्ड, बैंक खाते की फोटो कापी, पीड़ित काश्तकार की फोटो, ग्रामप्रधान की फोटो, ग्राम प्रधान की और क्षेत्रीय लेखपाल की जांच आख्या सहित भूमि के दस्तावेज प्रस्तुत करने होगे। साथ ही बर्बाद फसल के साथ गवाही के तौर पर ग्राम प्रधान की फोटो भी जमा करानी होगी। किसान बैशाख सिंह नेगी, राजेंद्र सिंह नेगी, प्रीतम सिंह नेगी, कमान सिंह रावत निवासी खांड गांव का कहना है कि जब उनकी फसलें बर्बाद हुई, तब उनको नियमों का पता नहीं था। अब मुआवजा लेने को आवेदन दे रहे है, तो उनका पता चल रहा है।
जनप्रतिनिधियों ने जताया एतराज
नई मुआवजा प्रणाली का तमाम जनप्रतिनिधियों ने कड़ा एतराज जताया है। जिला पंचायत सदस्य रायवाला अनिता कंडवाल, ग्राम प्रधान गौहरीमाफी सरिता रतुड़ी, ग्राम प्रधान खांडगांव उदिना नेगी का कहना है कि वन्य जीवों के आतंक से किसान पहले ही परेशान है। अब वन विभाग नियमों में बदलाव कर उनकी परेशानी को और बढ़ा रहा है। किसानों की इस समस्या के समाधान को उन्होंने वन विभाग के आला अफसरों से वार्ता करने की बात कही है।
कोट..........
फसली नुकसान के मुआवजा के लिए किसानों से आवेदन मांगा जाता है। शासन की ओर से आठ सौ रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा दिया जाता है। मुआजवा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए गवाह के रूप में प्रधान की फसल के साथ फोटो मांगी गई है। जिन किसानों के पास फोटो नहीं है। उनके आवेदन ले लिए गए है। जल्द ही उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा।
महेंद्र गिरी, रेंज अधिकारी मोतीचूर रेंज राजाजी टाईगर रिजर्व