ऋषिकेश। तीर्थनगरी वासियों के दिलों में मायानगरी की किसी नायिका की तरह राज करने वाला शहर का पहला टॉकीज छाया सिनेमा हॉल वेंटिलेटर पर जाने के बाद अब पूरी तरह से दम तोड़ गया। 1958 में शुरू हुआ ये सिनेमा हॉल पहले 1992 बंद हुआ, अब कुछ दिनों बाद इसकी शानदार इमारत भी नहीं दिखाई देगी। 37 साल तक इस सिनेमा हॉल ने तीर्थनगरी ही नहीं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और यहां तक की पहाड़ से आने वाले लोगों का भी भरपूर मनोरंजन किया।
1958 में रेलवे रोड पर स्थित छाया सिनेमा हॉल की स्थापना लाला रतन चंद गुप्ता ने की थी। 37 साल तक इस सिनेमा हॉल ने कई उतार-चढ़ाव देखे। तब ये शहर का अकेला सिनेमा हॉल था। इसके बाद देहरादून या हरिद्वार में ही सिनेमा हॉल थे। छाया पिक्चर हॉल में तीर्थनगरी ही नहीं पहाड़ों से भी लोग सिर्फ पिक्चर देखने ऋषिकेश पहुंचते थे। 55 एमएम के पर्दे वाले इस सिनेमा हॉल में बालकनी नहीं थी। लेकिन लाला रतन चंद गुप्ता ने हॉल को कुछ इस तरह से डिजाइन करवाया था कि हॉल के भीतर एसी में बैठने का अहसास होता था।
तीर्थनगरी में 1975 तक छाया पिक्चर हॉल का एकछत्र राज रहा। इसके बाद देहरादून रोड पर शोभा पिक्चर हॉल खुल गया। जिसका नाम बाद में रामा पैलेस कर दिया गया। इसके अलावा कुछ वर्षों बाद यहां तीसरा सिनेमाघर भी वजूद में आया, जिसका नाम ऋषि टॉकिज था। जो कुछ सालों में बंद हो गया। छाया टॉकिज ने पूरे 37 वर्षों तक लोगों का भरपूर मंनोरंज किया। इसके बाद यह 1992 में बंद हो गया। इन दिनों इसके ध्वस्तीकरण का कार्य चल रहा है। अब लाला रतन चंद गुप्ता के नाती संजय गुप्ता ने बताया कि अब यहां मल्टीपलेक्स बनाने की तैयारी है।
----------------
फ्री में दिखाई गई थी पहली पिक्चर गोपाल भैया
ऋषिकेश। पिक्चर हॉल में लगी पहली पिक्चर गोपाल भैया उस समय दर्शकों को फ्री में दिखाई गई थी। तब यहां के बहुत से लोगों ने पहली बार सिनेमा हॉल में पिक्चर देखी थी। 90 के दशक में आई फिल्में प्यार झुकता नहीं, नमक हराम, वीराना, जल्लाद, कालिया जैसी फिल्मों को देखने के लिए लोग सिनेमा हॉल में दूर-दूर से उमंड़ पड़ते थे। तब 3 से 6, 6 से 9 और 9 से 12 का आखिरी शो चलता था। टिकट मात्र 25 पैसे से सवा रुपये तक होता था। स्पेशल शो का टिकट 3 रुपये का होता था।
कई लोगों को दिया रोजगार
ऋषिकेश। लाला रतन चंद गुप्ता के बाद उनके बेटे इंजीनियर महेंद्र गुप्ता हॉल का काम देखते थे। उस जमाने में इस हॉल को बहुत करीब से देखने वाले डॉ. एससी गौड़ (76) बताते हैं कि इस हॉल ने लोगों का मनोरंजन ही नहीं किया, उस दौर में बहुत से लोगों को रोजगार भी दिया। जय प्रकाश गुप्ता, शेखर गुप्ता, जनकराज गुप्ता यहां अलग-अलग समय में मैनेजर रहे। इसके अलावा कुंवर सैन गुप्ता, सरदार महेंद्र सिंह, प्रेम सिंह, राय सिंह आदि ने समय-समय पर ऑपरेटर की जिम्मेदारी संभाली।
..तब अमिताभ और रेखा आए थे शो देखने
ऋषिकेश। वर्ष 1978 में तीर्थगनरी में पिक्चर गंगा की सौगंध शूट की गई थी। तब मुख्य भूमिका में अमिताभ बच्चन और रेखा थे। एक दिन दोनों अपनी यूनिट के सदस्यों के साथ रात नौ से 12 का आखिरी शो देखने पहुंचे। उस वक्त उनका ये दौरा गुप्त रखा गया था। बहुत से लोगों को बाद में पता चला कि कल रात उन्होंने अमिताभ और रेखा के साथ बैठकर हॉल में पिक्चर देखी।