ऋषिकेश। तीर्थनगरी में चल रहे महायोग ध्यान और योग महोत्सव के दूसरे दिन योग और ध्यान की गहरी शिक्षाओं के साथ एक नया संकल्प भी जुड़ा। शिविर के दूसरे दिन 3,700 साधकों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम सुबह पांच बजे से ही योग और ध्यान सत्रों के साथ शुरू हो गया। इन सत्रों की मुख्य विशेषता लाइव म्यूजिक मेडिटेशन रहा। बांसुरी और तबला जैसे शास्त्रीय वाद्ययंत्रों की मधुर और शांत करने वाली धुनों के बीच सैकड़ों साधकों ने गहन ध्यान का अनुभव किया। दोपहर बाद शाकाहार रैली का आयोजन किया गया। इस रैली का उद्देश्य लोगों को शाकाहारी भोजन के स्वास्थ्य, नैतिक और पर्यावरणीय लाभों के प्रति जागरूक करना था। महान योग गुरु और पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट के संस्थापक ब्रह्मऋषि पत्री ने बताया कि हमें दूसरों के जीवन में झांकने के बजाय अपने स्वयं के मन, शरीर, विचारों और आंतरिक चेतना का निरीक्षण करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि यह आत्म-अवलोकन ही वास्तविक योग का आधार है। अब तक विभिन्न माध्यमों से लगभग 3 करोड़ लोगों तक योग और ध्यान का अभ्यास पहुंचाया जा चुका है। अब इस संख्या को दस गुना बढ़ाकर 30 करोड़ करने के लिए एक विस्तृत राष्ट्रीय अभियान पर मंथन चल रहा है।