प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका से भी नहीं नकारा जा सकता
अब इन तथ्यों के आधार पर पुलिस की पूरी जांच आउटसोर्स एजेंसी के मैनेजर विनायक और दूसरे व्यक्ति शिवा पर केंद्रित हो गई है। बताया जा रहा है कि शिवा भी पूर्व में आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से एम्स में नौकरी कर चुका है। जबकि दूसरा मुख्य आरोपी दीपक गुसाई वर्तमान में एम्स की आयुष्मान योजना में आउटसोर्स के माध्यम से तैनात है।
इन तीनों के आउटसोर्स एजेंसी से कनेक्शन से स्पष्ट हो रहा है कि नियुक्ति का सारा गोरखधंधा एम्स परिसर से ही संचालित हो रहा था, अब यह भी आशंका उठने लगी है कि यह नियुक्तियां फर्जी नहीं बल्कि मोटी रकम लेकर वास्तविक रूप से तो नहीं की जा रही थी। यदि यह नियुक्तियां वास्तविक रूप से गुपचुप तरीके से की जा रही थी तो इसमें एम्स के किसी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका से भी नहीं नकारा जा सकता है।
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मोहर लगाने के मिले थे निर्देश
बताया जा रहा है कि आउटसोर्स कंपनी की किसी महिला कर्मचारी ने पुलिस को दिए बयान मे बताया कि नियुक्ति पत्रों पर कंपनी की मोहर लगाई गई है। नियुक्ति प्रमाण पत्रों पर मोहर लगाने के लिए आउटसोर्स कंपनी के ही किसी प्रभावशाली व्यक्ति ने निर्देश दिए थे। हालांकि पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं है। फिर भी यदि यह तथ्य सत्य है तो स्पष्ट है कि पूरे प्रकरण में आउटसोर्स एजेंसी के कर्मचारी ही मुख्य भूमिका में हैं।
अमर उजाला ने पहले की जताई थी आशंका
अमर उजाला में प्रकाशित संवाद न्यूज एजेंसी की खबर एम्स और आउटसोर्स एजेंसी सवालों के घेरे में प्रकाशित हुई थी। जिस पर अब पुलिस जांच ने मुहर लगा दी है।