ऋषिकेश। एम्स में उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाओं और आपदाओं में घायलों की जान बचाने के लिए ट्रॉमा चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इसके लिए एम्स ऋषिकेश और राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के बीच एमओयू किया गया है। शनिवार को एम्स में वर्ल्ड ट्रॉमा वीक के समापन अवसर पर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड में ट्रॉमा चिकित्सा के क्षेत्र में एम्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राज्य सरकार संस्थान के साथ समन्वय कर प्रदेशभर में ट्रॉमा चिकित्सा प्रशिक्षण और संचालन के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करेगी।
एम्स निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि ट्रॉमा टेलीमेडिसिन और एयरो मेडिकल सेवाएं आपदा प्रभावित क्षेत्रों में घायलों तक समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण हैं। संस्थान इन तकनीक आधारित सेवाओं के माध्यम से कई मरीजों की जान बचाने में योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को दुर्घटनाओं के दौरान घायलों की सहायता के लिए प्रेरित किया जाएगा। ट्रॉमा वीक के आयोजन सचिव और ट्रॉमा सर्जन डॉ. मधुर उनियाल ने बताया कि एम्स की इमरजेंसी हेली एंबुलेंस सेवा से अब तक 354 लोगों का रेस्क्यू कर उपचार किया जा चुका है। उन्होंने राज्य की 108 एंबुलेंस सेवा की क्लीनिकल ऑडिट कराने की आवश्यकता बताई। इससे ट्रॉमा मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
एमओयू के तहत राजकीय मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सकों के साथ नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ को भी ट्रॉमा चिकित्सा का प्रशिक्षण दिया जाएगा। एम्स की ओर से कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह और ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कमर आजम और स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल प्रो. आशुतोष सयाना ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। कार्यक्रम में ट्रॉमा वीक के आयोजन में योगदान देने वाले चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों, तकनीशियनों और परिवहन, पुलिस व वन विभाग के सदस्यों को सम्मानित किया गया। इस दौरान प्रो. जया चतुर्वेदी, प्रो. पुनीत धमीजा सहित संस्थान के चिकित्सक और अधिकारी मौजूद रहे।