-2 गाय से शुरू की थी डेयरी, आज पौड़ी जिले की सबसे बड़ी डेयरी बनी
- यमकेश्वर के ढौषण गांव के हरेंद्र पयाल बने पहाड़ में स्वरोजगार की मिसाल
सुदीप कपरूवान
यमकेश्वर। पहाड़ों से पलायन और रोजगार की चुनौती के बीच ढौषण गांव के हरेंद्र पयाल ने गो-पालन को स्वरोजगार का जरिया बनाकर मिसाल पेश की है। वर्ष 2016 में महज दो गायों से डेयरी शुरू करने वाले हरेंद्र के पास आज 30 गायें हैं और उनकी डेयरी में प्रतिदिन डेढ़ से दो क्विंटल तक दूध का उत्पादन हो रहा है। उनकी डेयरी यमकेश्वर ब्लॉक ही नहीं, बल्कि पूरे पौड़ी जिले की प्रमुख बड़े उत्पादन वाली डेयरियों में शामिल हो गई है। वर्ष 2025 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ डेयरी फार्म का पुरस्कार भी मिल चुका है।
हरेंद्र पयाल ने शुरुआत में आसपास के गांवों और बाजारों में दूध व घी की बिक्री की। वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत बैंक से ऋण लेकर उन्होंने 10 और गायें खरीदीं। इसके बाद दूध उत्पादन बढ़कर करीब 80 किलो प्रतिदिन हो गया। लगातार मेहनत और विस्तार के बाद आज उनकी डेयरी में 30 गायें हैं।
डेयरी का दूध प्रतिदिन ऋषिकेश स्थित उनके आउटलेट तक पहुंचाया जाता है। दूध निकालने के लिए आधुनिक मिल्क पार्लर मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे स्वच्छता और गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है।
प्रोसेसिंग यूनिट से बढ़ेगी आय
केंद्र सरकार की योजना के तहत डेयरी में प्रोसेसिंग यूनिट भी स्थापित की गई है। अब यहां दूध से घी, पनीर और खोया जैसे उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इससे उत्पादों में वैल्यू एडिशन के साथ आय बढ़ने की उम्मीद है।
हरेंद्र पयाल ने अपनी डेयरी में पांच स्थानीय लोगों को रोजगार दिया है। इसके साथ ही वह गौशाला और कृषि कार्य भी संचालित कर रहे हैं। उनका प्रयास पहाड़ के युवाओं को गांव में रहकर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
- गांव में डेयरी काम शुरू किये करीब 10 वर्ष हो चुके हैँ। खुशी होती है जब हम अन्य लोगों को रोजगार से जोड़ते हैं। गांव में स्वरोजगार असीमित संभावनाएं हैं।-हरेंद्र पयाल डेयरी संचालक ढौषण