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Rishikesh News: 96 पेड़ कटे, एक व्यक्ति के खिलाफ हुआ मुकदमा

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रानीपोखरी के शांतिनगर गांव में आम के पेड़ काटे जाने के मामले में पुलिस ने एक व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इस संबंध में मंगलवार देर शाम उद्यान विभाग ने शिकायत दर्ज कराई थी।



उद्यान विभाग ने पुलिस को दो तहरीर दी थी। दोनों में अलग-अलग व्यक्तियों के नाम लिखे गए थे। पुलिस का कहना है कि मामले में एक व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उक्त व्यक्ति भू स्वामी बताया जा रहा है। विवेचना के दौरान अन्य नामों के आने की भी संभावना है।
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रविवार रात को तस्करों ने रानीपोखरी के शांतिनगर गांव में आम के दशकों पुराने एक बगीचे में 96 पेड़ों को काट दिया था। मामले की भनक लगने पर वन विभाग ने 42 तस्करों को घेर लिया था। बाद में इन्हें रेंज कार्यालय लाया। जहां नाटकीय घटनाक्रम के बाद वन विभाग ने उद्यान विभाग के अधिकार क्षेत्र की बात कह कर सभी 42 लोगों को छोड़ दिया था। वहीं उद्यान विभाग ने आम के पेड़ो को काटे जाने की किसी प्रकार की सूचना से साफ इंकार कर दिया था।



मामला सोमवार सुबह से ही सोशल मीडिया में वायरल हो रहा था। बावजूद इसके उद्यान विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। मंगलवार को अखबारों में प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद उद्यान विभाग के अधिकारियों ने देर शाम करीब साढ़े पांच बजे पुलिस को इस संबंध में तहरीर दी। लेकिन तहरीर देते समय भी उद्यान विभाग यह तय नहीं कर पाया था कि शिकायत किसके खिलाफ करनी है।

पुलिस का कहना कि उद्यान विभाग ने पहले एक तहरीर दी और फिर उसके बाद दूसरी तहरीर दी है। दोनों तहरीरों में अलग-अलग लोगों के नाम शामिल हैं। वहीं पुलिस ने देर रात मामले में एक व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। थानाध्यक्ष विकेंद्र सिंह ने बताया कि फल उद्यान अधिकारी श्वेता चौहान की शिकायत के आधार पर इंद्र राज सिंह नाम के व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायत में उक्त व्यक्ति को भू स्वामी बताया गया है। विवेचना में अन्य नामों के शामिल होने की संभावना है। जांच की जा रही है।
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हाई प्रोफाइल मामले में बताए जा रहे सफेदपोश भी शामिल



बताया जा रहा है कि जिस व्यक्ति की शह पर यह पेड़ कटवाएं गए हैं, उसे क्षेत्र के सफेदपोश लोगों का संरक्षण प्राप्त है। इसलिए इस पूरे प्रकरण में वन विभाग व उद्यान विभाग तत्काल व स्पष्ट कार्रवाई करने से बच रहे हैं। इतना ही नहीं उद्यान विभाग के अधिकारी मीडिया का फोन उठाने से भी बच रहे हैं। मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद असमंजस की स्थिति बनाए रखने के लिए दो तहरीर दी। जिसमें अलग-अलग लोगों के नाम लिखे गए हैं।
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