ब्यूरो/अमर उजाला
ऋषिकेश। क्रानिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) दुनियाभर में दिल की बीमारियों और कैंसर के बाद वर्ष 2020 तक मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण होगा। इस बीमारी से भारत में पुरुष आठ फीसदी और महिलाएं चार फीसदी ग्रसित हैं। भारत में राष्ट्रीय सीओपीडी रोकथाम एवं नियंत्रण प्रोग्राम की जरूरत है। यह बात मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के डा. वैभव चाचरा ने कही।
मंगलवार को एक होटल में पत्रकारों से वार्ता करते हुए मैक्स अस्पताल देहरादून के डॉ. वैभव चाचरा ने सीओपीडी बीमारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस बीमारी से ग्रसित व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी, बार-बार खांसी, छाती में घरघराहट, छाती में जकड़न आदि होती है। उन्होंने बताया कि एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार मरीज सांस की उस बीमारी का नाम तक नहीं जानते, जिससे वे पीड़ित हैं। इसमें सांस के साथ विषैले, धातु कण, धुआं और प्रदूषण के कण फेफड़ों में चले जाते हैं। डॉ. राहुल प्रसाद ने बताया कि मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल सीओपीडी के उपचार में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में सीओपीडी का उपचार बहुत ही कम अस्पतालों में किया जा रहा है। इसमें देहरादून का मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में समय रहते इस बीमारी का उचित उपचार किया जा सकता है।