एम्स में पहला 16 बेड का पीडियाट्रिक आईसीयू (पीकू) शुरू हो गया है। इस वार्ड में तीन शिफ्टों में 60 अनुभवी चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी 24 घंटे गंभीर बीमार बच्चों की निगरानी करते हैं। वहीं संबंधित बाल रोग विशेषज्ञ भी दिन में दो बार वार्ड का राउंड कर भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य परीक्षण, चिकित्सा एवं उपचार फाइल का अवलोकन कर उपचार का प्रोटोकॉल लिखते हैं।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एम्स में एम्स पीकू वार्ड का लोकार्पण किया। इसमें गंभीर बाल मरीजों के लिए आठ इंटेंसिव केयर बेड (आईसीयू), छह हाई डिपेंडेंसी बेड (एचडीयू) और दो आइसोलेशन बेड शामिल हैं। एम्स के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नवनीत बट ने बताया कि आईसीयू बेड पर हर शिफ्ट में एक-एक नर्सिंग स्टाफ तैनात रहता है।
उन्होंने बताया कि हाई डिपेंडेंसी और आइसोलेशन के दो बेड पर नर्सिंग स्टाफ रहता है। इसके साथ एक समय पर वार्ड में दो एमडी चिकित्सक की तैनाती रहती है। वहीं दो बेड पर एक वार्ड ब्वॉय की ड्यूटी भी रहती है। बताया कि संबंधित मरीजों के डॉक्टर दिन में दो बार मरीजों के स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार का प्रोटोकॉल लिखने के लिए वार्ड में राउंड लेते हैं। डॉ. नवनीत बट ने बताया कि हर आठ घंटे में शिफ्ट बदलती है। तीन शिफ्टों में 60 अनुभवी चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मी मरीजों के स्वास्थ्य की निगरानी करते हैं।
हर रोग की गंभीर स्थिति के मरीज किए जाते है भर्ती
डॉ. नवनीत बट ने बताया कि पीकू वार्ड में किसी भी रोग की गंभीर स्थिति के बाल मरीजों को भर्ती किया जाता है। इसमें भर्ती होने वाले बाल मरीजों की उम्र एक माह से अधिक और 18 वर्ष तक के मरीजों को भर्ती किया जाता है। जिसमें मल्टी आर्गन फेल्योर, दिमागी बुखार, शॉक, सेप्सिस, लंग फेल्योर, लिवर फेल्योर हार्ट फेल्योर, किडनी फेल्योर, डायबिटीज किटोसिस एसिडोसिस (शुगर का स्तर बढ़ने की गंभीर स्थिति), ब्रेन हेमोरेज, गंभीर अस्थमा अटैक जैसे विभिन्न गंभीर रोग से ग्रस्त बाल मरीजों का उपचार किया जाता है।
वार्ड कौन सी मशीनें होती है उपलब्ध
- वेंटिलेटर, बाइपैप मशीन, फाइव पैरा मॉनिटर, नेब्युलाइजर, सक्शन मशीन आदि मशीन उपलब्ध रहती हैं।