प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नौ नवंबर की मध्यरात्रि से 500 और 1000 रुपये के नोट के बंद होने के सार्वजनिक एलान के बाद तीर्थनगरी में हलचल मच गई। प्रतिबंधित नोटों को जमा कराने के लिए रात में ही लोग घरों से बैंकों की कैश डिपॉजिट मशीन (सीडीएम) की ओर दौड़ पड़े। स्थिति यह हुई कि सीडीएम में लोगों का हुजूम लग गया। रुपये जमा कराने के लिए मारामारी दिखी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह भीड़ को काबू में किया। कुछ लोगों ने पीएम के एलान को सर्जिकल स्ट्राइक बताया।
मंगलवार रात करीब साढ़े आठ बजे टीवी चैनलों में प्रधानमंत्री के पांच और एक हजार नोटों के बंद करने के एलान की खबर सुनते ही लोग अचंभित हो गए। मोबाइल से एक दूसरे से संपर्क साध खबर की पुष्टि करने लगे। सच्चाई सामने आने पर लोगों ने अपनी आलमारी और पर्स टटोलकर पांच और एक हजार रुपये के नोट निकाले और उसे जमा करने के लिए दून रोड, रेलवे रोड, हरिद्वार रोड स्थित एसबीआई, पीएनबी की कैश डिपॉजिट मशीन की और दौड़ पड़े। देखते ही देखते एटीएम में रुपये जमा कराने वालों की भीड़ लग गई। कई जगह बेकाबू भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया
व्यापारी केके सचदेवा ने प्रधानमंत्री के एलान को जल्दबाजी बताया। कहा कि 500 और 1000 रुपये को बंद करने से पहले उन्हें जनता को कुछ दिन की मोहलत दी जानी चाहिए थे। अचानक बंदी के एलान से जनता की फजीहत होगी।
वार्ड सदस्य लोकेश कुमार झा ने प्रधानमंत्री के फैसले को आम जनता के हित में बताया। कहा कि कालाधन रखने वालों की आफत आ गई है। सामाजिक कार्यकर्ता कमल अरोड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देेशहित में अच्छा फैसला लिया है।
प्रदेश कांग्रेस सेवादल के विधानसभा अध्यक्ष दीपक धमांदा ने नोट बंदी के एलान पर कड़ा विरोध जताया। कहा कि अचानक इस तरह के एलान से प्रधानमंत्री का तानाशाह चेहरा सामने आया है। कांग्रेस सड़कों पर उतर इसका विरोध करेगी।
पेट्रोल में चलाए नोट
प्रधानमंत्री के एलान के बाद काफी संख्या में लोगों ने पेट्रोल पंप का रुख किया। यहां पांच सौ और हजार रुपये का नोट देकर बाइक और कार में पेट्रोल भरवाया। शहर के पेट्रोल पंपो में भी देर रात तक भीड़ रही।