ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। गंगा के संरक्षण और अविरल प्रवाह के लिए लागू की गईं तमाम गाइड लाइंस धरातल पर किस लागू की जा रही हैं इसका नजारा वीरपुर खुर्द में देखा जा सकता है। अवैध निर्माणकर्ता अब गंगा तट से महज दस मीटर के दायरे में ही निर्माण करने में जुट गए हैं। इसमें सरकारी अफसर से लेकर नामीगिरामी आश्रम संचालक तक शामिल हैं। हालात ये हो गए हैं कि एचआरडीए (हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण) के अधिकारी मौके पर जाने की जहमत तक नहीं उठा रहे।
एनजीटी से लेकर कोर्ट तक ने गंगा के संरक्षण के लिए तमाम गाइडलाइन बना रखी हैं। ताजा फैसले में कोर्ट ने कहा है कि गंगा की सतह से दो सौ मीटर के दायरे में निर्माण और पांच सौ मीटर की परिधि में कूड़ा डालना दंडनीय अपराध माना जाएगा। इसके विपरीत वीरपुर खुर्द में गंगा तट से महज दस मीटर से भी कम दूरी पर ईओडब्ल्यू (इकोनॉमिक ऑफेंस विंग) के एक इंस्पेक्टर का मकान बन रहा है। ये सरकारी अफसर लखनऊ के इंदिरा भवन में तैनात है। अफसर से नियमों और अवैध निर्माण के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि एक लाइन से देखिए कितने कंस्ट्रक्शन हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि कई वर्ष पहले जमीन ली थी। जानता हूं कि मेरा पैसा फंस गया और निर्माण अवैध है। जमीन को बेंचना चाहता हूं। कई साधु संत जमीन देखने आए भी लेकिन डील हो नहीं पाई। खरीदने के इच्छुक लोगों का साफ कहना है कि निर्माण करवा दीजिए, इसके बाद खरीद लूंगा। इंस्पेक्टर की दलील है कि मैं जमीन बेचने के लिए निर्माण करवा रहा हूं। मुझे किसी भी हाल में अपना पैसा निकलवाना है। यदि नियम लागू होते हैं तो एक लाइन से बने सैकड़ों निर्माणों को पहले ध्वस्त किया जाए।
पहले आश्रम बनवाया और बाउंड्रीवाल
वीरपुर खुर्द में ही एक नामी आश्रम की शाखा भी संचालित हो रही है। वर्षों पहले गुपचुप तरीके से गंगा तट से करीब 50 मीटर के अंतराल में आलीशान निर्माण करवा दिया गया। इस अनियमितता के आगे सारी गाइडलाइन भी घुटने टेकती नजर आती हैं। नियमों के प्रति निडरता और दुस्साहस का आलम ये है कि अब आश्रम प्रबंधन गंगा तट की ओर करीब दस मीटर आगे बढ़कर बाउंड्रीवाल करवा रहा है। मजे की बात तो ये है कि एचआरडीए को इसकी भनक तक नहीं है।
देखते ही देखते चाहरदीवारी के अंदर हो गया भव्य निर्माण
वीरपुर खुर्द गंगा तट से करीब 60 मीटर की दूरी पर ऐसा ही कारनामा हो रहा है। यहां एक अन्य व्यावसायिक निर्माण जारी है। बाहर से ऊंची बाउंड्रीवाल खड़ी कर दी गई है, जिससे अंदरखाने चल रही गतिविधियों का अंदाजा तक नहीं लग पाता। हकीकत ये है कि बाउंड्रीवाल के भीतर रिसोर्ट तैयार किया जा रहा है। गेट पर लटक रहे ताले से लोगों को यही अंदाजा लगता है कि अंदर सन्नाटा होगा। एचआरडीए अफसर भी गंगा तट पर हो रहे खतरनाक खेल से या तो अंजान हैं या फिर जानबूझकर नजर फेरी गई है।
कोट्स
गंगा तट पर निर्धारित दूरी के अंदर निर्माण हो रहा है तो ये सरासर अनियमितता है। बेफिक्र रहिए सोमवार को टीम भेजकर मौका मुआयना करवाया जाएगा। तत्काल अवैध निर्माण पर रोक लगाई जाएगी। इस दुस्साहस पूर्ण गतिविधि पर नियमानुसार कार्रवाई की सिफारिश भी होगी, जिससे अन्य लोगों को सबक मिल सके।
- श्याम मोहन शर्मा, अधिशासी अभियंता, एचआरडीए