ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। केदारनाथ मेें आई आपदा के छह वर्षों के बाद भले ही अब तस्वीर बदल गई हो लेकिन लोगों के जेहन में आज भी वो भयावह वाकया कैद है। कई लोगों ने अपने परिजनों को उस आपदा में खो दिया था। कई ऐसे भी रहे जिनका आज तक कुछ पता नहीं चल पाया। ढालवाला में रहने वाले दो परिवार आज भी दरवाजे पर आहट का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि वर्ष 2013 में केदारनाथ गए उनके परिजन जरूर वापस लौटेंगे। केदारनाथ त्रासदी की घटना को याद कर दोनों परिवार के सदस्यों की आंखें छलक उठीं।
केदारनाथ त्रासदी का जिक्र करते ही ढालवाला निवासी वैभव थपलियाल की आंखों से आंसूओं की धारा बह निकली। उन्होंने बताया कि 15 जून 2013 की शाम को मां कांता रानी (58 वर्ष) से बात हुई थी। फोन पर उन्होंने बताया कि वह मंदिर परिसर में ही हैं। उसके बाद 18 जून तक उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया। टेलीविजन के माध्यम से पता चला कि केदारनाथ में आपदा आ गई है। ट्रैवल कंपनी से बस का पता लेकर किसी तरह से वहां पहुंचा। वीभत्स नजारा देखकर दिल दहल गया। सब कुछ तबाह हो चुका था। बस में केवल मां के कपड़े और बैग ही पड़े मिले। वैभव बताते हैं कि मां ही घर की मुखिया थीं। उनके जाने से परिवार की जैसे सोचने और समझने की क्षमता ही कहीं गुम हो गई है। मां के आत्मा की शांति के लिए हम प्रतिवर्ष परिवार सहित कपाट खुलने पर केदारनाथ दर्शन को जाते हैं। उन्होंने बताया कि मां कांता रानी नरेंद्रनगर के समीप ओणी गांव में अध्यापक के पद पर कार्यरत थीं।
पति की याद में मंदिर बनाया
केदारनाथ आपदा का शिकार हुए गोविंद सिंह नेगी के परिजन आज भी उनका इंतजार करते हैं। उन्हें आज भी यकीन नहीं होता कि वह उनके बीच नहीं रहे। गोविंद सिंह नेगी पेशे से ड्राइवर थे। आपदा के वर्ष वह वह यात्रियों से भरी बस लेकर केदारनाथ गए थे। उनकी पत्नी चंद्रा देवी ने बताया कि 15 जून वर्ष 2013 को रात के 11 बजे उनकी बात पति से हुई थी। फोन पर उन्होंने जानकारी दी थी कि अभी वह मंदिर परिसर के समीप हैं। 16 जून के बाद से न उनके पति का कहीं पता लग पाया और न हीं उनकी बस की कोई खबर है। चंद्रा देवी ने बताया कि पति गोविंद सिंह की स्मृतियों को संजोने के लिए गांव मेें उनका मंदिर बनाया गया है। चंद्रा देवी कहती है कि उन्हें आज भी ऐसा प्रतीत होता है कि उनके पति घर पहुंचने वाले हैं।