ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में वर्कशॉप ऑन लिमफोमा का आयोजन किया गया। इसमें विशेषज्ञ चिकित्सकों ने रक्त में पाए जाने वाले लिमफोमा कैंसर के विषय पर नवीनतम डेवलपमेंट, शोध, परीक्षण व चिकित्सा के बारे में बताया। एम्स के मिनी ऑडिटोरियम में कैंसर चिकित्सा रुधिर विज्ञान विभाग की ओर से वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इस मौके पर संस्थान के निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने कहा कि रक्त से जुड़े लिमफोमा कैंसर के तहत नवीनतम शोधों, कैंसर की जांच पड़ताल व उपचार विषय पर जानकारियों को साझा करना जरूरी है। इससे रोगियों को समुचित उपचार मिल सकेगा।
उत्तराखंड व समीपवर्ती क्षेत्रों से एम्स संस्थान में लिमफोमा से जुड़े कई मरीज आ रहे हैं। इनमें बच्चे व वयस्क शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे मरीजों को संस्थान की ओर से आधुनिक चिकित्सा के माध्यम से 50 से 90 फीसदी लोगों को रोगमुक्त किया जा रहा है। अस्पताल में आने वाले मरीज विभिन्न प्रकार के लिमफोमा से ग्रस्त पाए जा रहे हैं। ऐसे रोगी उत्तराखंड ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हिमाचल आदि स्थानों से एम्स में उपचार कराने को आ रहे हैं।
कार्यशाला में टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल मुंबई के प्रो. गौरव नरुला और प्रो. सुमित गुजराल ने रक्त से जुड़े लिमफोमा कैंसर के लक्षण, पहचान व परीक्षण प्रणाली व उपचार से संबंधित जानकारी दी। इनमें एम्स के अलावा हिमालयन अस्पताल जौलीग्रांट, दून अस्पताल, टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल मुंबई, डीएमसी हॉस्पिटल लुधियाना के प्रतिनिधि शामिल थे। इस अवसर पर डीन प्रो. सुरेखा किशोर, डीन प्रो. मनोज गुप्ता, प्रो. लतिका मोहन, डॉ. उत्तम कुमार नाथ, प्रो. सीमा आचार्य, प्रो. बीपी कालरा आदि मौजूद थे।