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ऋषिकेश : भगवान के चरणों के फूलों से महका रहे खुशबू

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प्रतीकात्मक
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।

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भगवान के दर्शन करना और उनके चरणों में फूल चढ़ाना आम तौर पर सभी की दिनचर्या में होता है। चढ़ाए हुए फूल अगले दिन कचरे में फेंक दिए जाते हैं या फिर नदी में प्रवाहित किए जाते हैं। इन्हीं फूलों से दोबारा खुशबू महकाने का काम रोहित प्रताप कर रहे हैं। वह इन फूलों का दोबारा उपयोग कर अगरबत्ती बनाने का काम कर रहे हैं। रोहित ने छोटे बिजनेस से काम शुरू किया तो नगर निगम भी रोहित की सहायता के लिए आगे आया। ऋषिकेश के मंदिरों में चढ़ने वाले फूल अब फेंके नहीं जाते बल्कि फूलों से अगरबत्ती बनाई जा रही है। इनसे बनी अगरबत्ती मार्केट में आ गई हैं।

मूल रूप से फरीदाबाद हरियाणा निवासी रोहित प्रताप ने बताया कि उन्होंने करीब साढ़े तीन लाख रुपये की लागत से अगरबत्ती बनाने का काम शुरू किया था। यह पूरी तरह से हस्तनिर्मित है। शाम के समय नगर निगम की गाड़ी से ऋषिकेश के प्रत्येक मंदिर से बासी फूलों को उठाया जाता है। जिन्हें सुखाकर उसका पाउडर बनाया जाता है। इसके बाद इसकी अगरबत्ती तैयार की जाती है। नभ अगरबत्ती के नाम से अगरबत्ती को मार्केट में उतारा गया है। पूरे निर्माण कार्य में कहीं भी कोयला और चारकोल का प्रयोग नहीं होता है। फिलहाल चारधाम यात्रा जाने वाले यात्रियों के लिए बीटीसी में अगरबत्ती का स्टॉल लगाया गया है।
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महिलाओं को भी मिला रोजगार
अगरबत्ती बनाने के लिए वर्तमान में करीब 10 महिलाएं काम करती हैं। शाम के समय शिवाजी नगर क्षेत्र में करीब 20 महिलाओं को अगरबत्ती बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही है।

प्रत्येक मंदिर में लगाए हैं फूल डालने के लिए डस्टबीन
बेकार फूलों को डालने के लिए उनकी ओर से ऋषिकेश के सभी मंदिरों में कूड़ेदान लगाए हुए हैं। सभी कूड़ेदानों पर आकर्षक ढंग से लिखा है कि रास्ते में पड़े फूलों को कूड़ेदान में डालें।
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नगर निगम ने मंदिर में प्रयोग किए फूलों को उठाने के लिए ओडिनी प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड को कूड़ा गाड़ी मुहैया कराई गई है। इसका कोई चार्ज कंपनी से नहीं लिया जाता है। प्रतिदिन गंगा में गिर रहे फूलों से गंगा काफी प्रदूषित हो रही थी। इसके समाधान के लिए नगर निगम ने यह उपाय निकाला है। निगम क्षेत्र के सभी मंदिरों से शाम के समय बेकार फूलों को प्रतिदिन उठाया जाता है।
- सचिन रावत, सफाई निरीक्षक, नगर निगम ऋषिकेश

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