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नारी अबला नहीं, वह हमेशा से सबला रही है: गुरु मां

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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
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नारी अबला नहीं है, वह हमेशा से ही सबला रही है। समाज के गलत दृष्टिकोण के चलते ऐसी धारणा बना दी गई है कि नारी अबला है। नारी अबला के पीछे पुरुष प्रधानता होना भी एक बहुत बड़ा कारण है। वास्तव में तो सच यह है कि नारी खुद में अपराजिता है, वह पहले स्वयं को सशक्त और सम्मानित माने।
ये बातें आनंद मूर्ति गुरु मां ने बुधवार को बुधवार को वानप्रस्थ आश्रम में आयोजित अमर उजाला के मिशन अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम में कहीं। इस अवसर पर आनंद मूर्ति गुरु मां और भरत मिलाप आश्रम के संस्थापक अध्यक्ष रामकृपालु महाराज ने अमर उजाला के मिशन अपराजिता पोस्टर भी लांच किया। इस दौरान आनंद मूर्ति गुरु मां ने कहा कि नारी और पुरुष दोनों एक दूसरे के पूरक है। अर्धनारीश्वर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। अगर हम प्रकृति, न्याय व दर्शनशास्त्र की दृष्टि से देखें तो नारी सशक्त नहीं है, इसका कहीं भी वर्णन नहीं है। उन्होंने कहा कि पढ़ाने की बात आती है, तो लड़की को नहीं पढ़ाया जाता है, बल्कि लड़कों को तवज्जो दी जाती है। जबकि सर्वविदित है कि यदि लड़की शिक्षित होगी तो वही पत्नी और मां बनेगी और मां शिक्षित होगी तो पूरा परिवार शिक्षित होगा। जिस घर में मां शिक्षित होगी वहां अच्छे के लोगों में अच्छे संस्कार देखने को मिलेंगे। इतिहास देखें तो जितने भी वीर योद्धा हुए हैं, उनकी मां की भूमिका काफी अहम थी। अगर हम ऋषियों की बात करें तो देवभूति की शक्ति के बगैर कपिल मुनि महान कैसे होते। गुरु मां ने अमर उजाला के नारी सशक्तिकरण पर आधारित मिशन अपराजिता अभियान को सराहनीय कदम बताया।
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बुद्धि, बल और धन तीनों ही देवी से
आनंद मूर्ति गुरु मां ने कहा कि भारत में ज्ञान का सूचक नारी रूपी मां सरस्वती, बल का सूचक दुर्गा मां और धन का सूचक लक्ष्मी को माना गया है। जब तीनों ही महत्वपूर्ण चीजें मनुष्य को एक नारी रूपी देवी से मिलती हैं, तो इस संसार में एक नारी कमजोर कैसे हो सकती है। एक नारी में सरस्वती, दुर्गा और लक्ष्मी तीनों का वास होता है।
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नारी स्वयं में अपराजिता, बस समझने की जरूरत
आनंद मूर्ति गुरु मां ने कहा कि एक नारी स्वयं में अपराजिता होती है। उसे जरूरत है तो सिर्फ अपने को समझने की। जिस प्रकार हनुमानजी समुद्र पार करते समय अपनी शक्तियों को भूल बैठे थे। तब जामवंत ने उन्हें उनकी शक्तियों के बारे में बताया था। उसके बाद उन्हें अपनी शक्तियां याद आ गई थीं। ठीक ऐसे ही एक नारी को भी अपने अंदर के सशक्तिकरण को पहचानने की जरूरत है। इसके बाद वह स्वयं में अपराजिता बन जाएगी।
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