ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में आयोजित जोनल टास्क फोर्स की टीबी पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शुक्रवार को संपन्न हो गई है। कार्यशाला के दूसरे दिन देश के विभिन्न हिस्सों से आए क्षयरोग विशेषज्ञों ने भारत को तपेदिक से मुक्त बनाने पर चिंतन मंथन किया। एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने कहा कि देश से टीबी की बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए गंभीरता से प्रयास करने होंगे। टीबी जैसी जानलेवा बीमारी का उन्मूलन इसके संक्रमण की रोकथाम से ही संभव है। इसके लिए चिकित्सकों को टीबी की आधुनिक गाइडलाइन के बारे में जानकारी व जागरूक होना होगा।
इस दौरान डॉ. बविंदर सिंह ने बताया कि यदि तपेदिक रोग की जांच गुणवत्तापूर्वक नहीं की जाती है, तो उससे बहुत सारे टीबी के मरीज लाइलाज ही रह जाते हैं। डीन डॉ. सुरेखा किशोर ने बताया कि कार्यशाला के आयोजन में डॉ. प्रदीप अग्रवाल, डॉ. महेंद्र सिंह, डॉ. योगेश, डॉ. भावना, डॉ. कंचन, डॉ. नेहा व पीजी स्टूडेंट्स ने सहयोग किया। इस अवसर पर डॉ. अश्विनी खन्ना, डॉ. बरिंदर सिंह, डॉ. अल्मास शमीम, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. अशोक भारद्वाज, डॉ. एसी फुकान, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. सूर्यकांत आदि मौजूद थे।